चंडीगढ़। पंजाब में धार्मिक भावनाओं को आहत करने और पवित्र ग्रंथों की बेअदबी करने वालों के खिलाफ अब कानून और अधिक सख्त हो गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब विधानसभा ने हाल ही में सर्वसम्मति से जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल, 2026 पारित किया है। इस नए कानून के तहत बेअदबी के दोषियों को उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

इस फैसले का श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने गर्मजोशी से स्वागत किया है। उन्होंने इसे पूरी सिख संगत के लिए एक बड़ा सम्मान और तोहफा करार दिया है।

600 बेअदबियों का नहीं मिला न्याय

इस ऐतिहासिक बिल पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि सिख धर्म में श्री गुरु ग्रंथ साहिब को जीवित गुरु का दर्जा प्राप्त है। हालांकि, पिछले कुछ दशकों से, विशेष रूप से 2015 के बाद, बेअदबी की घटनाओं में भारी वृद्धि हुई है।

उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि अब तक लगभग 600 बेअदबी की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन पिछली सरकारों और प्रशासन ने हमेशा ढिलाई बरती। दोषियों को अक्सर मानसिक रूप से कमजोर, पागल या नाबालिग बताकर छोड़ दिया जाता था। आज तक किसी भी सरकार ने इन मामलों में सिखों को न्याय नहीं दिलाया।

उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ हुई संत समाज की बैठक को याद करते हुए कहा कि सीएम ने वादा किया था कि वे ऐसा कड़ा कानून लाएंगे कि भविष्य में दोबारा कानून बनाने की जरूरत न पड़े। आज उस वादे को पूरा होते देख सिख संगत में राहत है। पूर्व जत्थेदार ने मांग की कि अब सरकार को उन 600 पुरानी घटनाओं की भी निष्पक्ष जांच कर न्याय सुनिश्चित करना चाहिए।

प्रकाश सिंह बादल पर सवाल

इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को फखर-ए-कौम का खिताब वापस दिए जाने की मांग पर भी ज्ञानी रघबीर सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दो टूक शब्दों में सवाल उठाते हुए कहा कि दिवंगत प्रकाश सिंह बादल पर किस बात का फखर (गर्व) किया जाए? ज्ञात हो कि डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को माफी देने के विवादित मामले के बाद प्रकाश सिंह बादल से फखर-ए-कौम का खिताब वापस ले लिया गया था।