सत्या राजपूत, रायपुर। छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों द्वारा सीजी बोर्ड की मान्यता लेकर CBSE पैटर्न का झांसा देकर मनमानी फीस वसूली का मामला लल्लूराम डॉट कॉम ने प्रमुखता से उठाया था। इस मामले में लोक शिक्षण संचालनालय ने संज्ञान लिया है और सभी संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा को पत्र जारी कर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की तीन सालों की फीस निर्धारण की रिपोर्ट मांगी है। बता दें कि निजी स्कूलों में हर साल शुल्क, पुस्तक और ड्रेस के नाम पर सैकड़ों करोड़ वसूली की जा रही है, जिससे पालक परेशान हैं।
वहीं इस मामले में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा है कि CG बोर्ड की मान्यता में CBSE पाठ्यक्रम बताकर धोखा देना अपराध है। पूरा 400 BC का मामला है। CBSE पैटर्न बताकर कोई भी धोखा नहीं दे सकता। ऐसे स्कूलों पर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए अधिकारियों को निर्देशित किया जा चुका है। मंत्री ने कहा, CG बोर्ड के स्कूलों में SCERT का किताब ही चलेगा। बाहरी प्रकाशनों के किताब के नाम पर दुकानदारी नहीं चलेगी। जो निर्धारित पुस्तक है उसी पाठ्यक्रम में पढ़ाई होगी। बोर्ड के नाम पर धोखाधड़ी करने वालों पर ना सिर्फ़ कार्रवाई होगी उन पर FIR भी होगा।


चौंकाने वाले आंकड़े
राज्य में कुल 57053 स्कूल हैं, जिनमें 6800 निजी स्कूल है। इनमें 6100 सीजी बोर्ड हिंदी-अंग्रेजी माध्यम है, 520 वास्तविक CBSE संबद्ध और मात्र 24 ICSE हैं। नवंबर में पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष ने 1784 सीजी बोर्ड मान्यता प्राप्त स्कूलों की सूची जारी की थी, जिसमें लिखा है कि इन स्कूलों ने निशुल्क किताबें नहीं लीं है. बदले में महंगी किताबें बेची गई है।

प्रदेशभर में CG बोर्ड की निःशुल्क पुस्तक नहीं लेने वाले स्कूलों की संख्या
रायपुर – 107, बिलासपुर 157, दुर्ग 135, जांजगीर-चंपा 106, सूरजपुर 106, सरगुजा 85, बलौदाबाजार-भाटापारा -43, गरियाबंद 25, धमतरी-31 महासमुंद 66, मुंगेली 74, रायगढ़ 73, कोरबा- 89, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही -23, सक्ती 89, सारंगढ़-बिलाईगढ़- 45, बालोद 36, बेमेतरा, 43, कबीरधाम (कवर्धा), 36, राजनांदगांव 51, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, 15, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी 12, कोरिया 30, बलरामपुर-रामानुजगंज 39, जशपुर 72, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB)42, बस्तर 40, कोंडागांव 17, नारायणपुर 6, कांकेर 47, दंतेवाड़ा, बीजापुर 7, सुकमा 4.
हाईकोर्ट में लगी है याचिका
हाईकोर्ट में लगी एक याचिका में उल्लेखित किया गया है कि राज्य में करीब 2,000 फर्जी CBSE स्कूल चल रहे हैं, जिन्हें शिक्षा विभाग के रिश्वतखोर अधिकारी संरक्षण दे रहे हैं। आरटीई के गरीब, वंचित छात्रों को भी महंगी फर्जी CBSE किताबें खरीदनी पड़ रही है या स्कूल छोड़ना पड़ रहा है। स्कूल मालिक प्रीमियम फीस लेकर मर्सिडीज, वोल्वो और ऑडी जैसी लग्जरी गाड़ियों में घूम रहे हैं।
ज्ञापन देने के बाद भी कार्रवाई नहीं
पालक संघ के प्रदेश अध्यक्ष किष्टोफर पॉल ने कहा था कि एक दर्जन से अधिक बार ज्ञापन देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्कूलों को सीजी बोर्ड से मान्यता है, लेकिन CBSE पैटर्न दिखाकर मोटी फीस और प्राइवेट प्रकाशकों की 8,000-10,000 रुपये वाली किताबें बेची जा रही हैं। हजारों गरीब बच्चों का भविष्य जानबूझकर बर्बाद किया जा रहा है।
स्कूल शिक्षा सचिव को शपथ पत्र दाखिल करने के दिए गए थे निर्देश
विकास तिवारी ने 11 मार्च 2026 को मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर के समक्ष जनहित याचिका में इन 1784 स्कूलों की सूची सौंपी थी। डिवीजन बेंच ने मामले की गंभीरता देखते हुए स्कूल शिक्षा सचिव को 24 मार्च 2026 तक शपथ-पत्र दाखिल करने का आदेश दिया था। विभाग के अधिकारी और स्कूल संचालक मिलीभगत कर बच्चों के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने जिला स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की। उन्होंने कहा, ऐसे स्कूलों की मान्यता नवीनीकरण रोका जाए और मान्यता देने वाले जिला शिक्षा अधिकारी व नोडल अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
पैरेंट्स एसोसिएशन ने लगाए थे गंभीर आरोप
पैरेंट्स एसोसिएशन का कहना था कि शिक्षा सचिव से तत्काल सख्त आदेश जारी करने की अपील करते रहे, लेकिन पैसों की खनक में गुहार पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सभी निजी स्कूल संबंधित बोर्ड सीजी, सीबीएसई की आधिकारिक किताबों और पाठ्यक्रम से ही पढ़ाई कराएं। फर्जी CBSE पैटर्न वाले स्कूलों पर तुरंत अंकुश लगाया जाए, जिला स्तर पर निगरानी और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता देश में 33 राज्यों में 32वें स्थान पर है. पैरेंट्स एसोसिएशन का कहना है कि यदि तुरंत कदम नहीं उठाए गए तो लाखों बच्चों का भविष्य हमेशा के लिए अंधकार में डूब जाएगा।
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