महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) ने रविवार को कई जिलों में 21 ठिकानों पर छापेमारी कर एक फुटबॉल क्लब की आड़ में चल रहे कथित कट्टरपंथी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। इस गिरोह का केंद्र नागपुर का एक दुकानदार था, जो कथित तौर पर यवतमाल के पुसाद स्थित एक क्लब का इस्तेमाल युवाओं को जिहादी विचारधारा में दीक्षित करने के लिए कर रहा था। महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधी दस्ता (ATS) ने यवतमाल और अहिल्यानगर (अहमदनगर) जिलों में एक ऐसे संदिग्ध नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जो फुटबॉल के प्रति रुचि रखने वाले मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने का काम कर रहा था. छापेमारी के दौरान अहिल्यानगर से तलवारें, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सीसीटीवी फुटेज और कई संदिग्ध दस्तावेज जब्त किए गए हैं.
महाराष्ट्र एटीएस ने यवतमाल और अहिल्यानगर में छापेमारी कर एक संदिग्ध कट्टरपंथ नेटवर्क का खुलासा किया है. यह नेटवर्क कथित तौर पर फुटबॉल क्लबों के जरिए मुस्लिम युवाओं को गुमराह कर रहा था. छापेमारी में तलवारें और इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिले हैं.
अधिकारियों का कहना है कि आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद एजेंसी ने इस सप्ताह की शुरुआत में 21 जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की और कई संदिग्धों को हिरासत में लिया. तलाशी के दौरान अधिकारियों ने तलवारें और अन्य कई सामग्रियां भी जब्त कीं.
एटीएस अधिकारियों का कहना है कि अभी तक कोई औपचारिक मामला दर्ज नहीं किया गया है. वर्तमान में जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है. सीसीटीवी फुटेज के जरिए संदिग्धों की आवाजाही और बैठकों के नेटवर्क को ट्रैक किया जा रहा है. जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
ऐसा संदेह कि फुटबॉल से संबंधित कुछ प्लेटफार्मों का उपयोग कमजोर युवाओं की पहचान करने, उन्हें प्रभावित करने और उन्हें विचारधारा की चपेट में लेने के लिए किया जा रहा था.
छापेमारी के दौरान अहिल्यानगर से तलवारें, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सीसीटीवी फुटेज और कई संदिग्ध दस्तावेज जब्त किए गए हैं. जांच में यह भी सामने आया है कि इस प्रक्रिया के तहत कुछ लड़कों को महाराष्ट्र से बाहर भी भेजा गया था, जिससे सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं.
जांचकर्ताओं के अनुसार, यवतमाल के पुसाद क्षेत्र में फुटबॉल काफी लोकप्रिय है और वहां कई स्थानीय क्लब सक्रिय हैं. संदिग्ध नेटवर्क इन क्लबों के माध्यम से उन लड़कों की पहचान करता था जो फुटबॉल में सक्रिय थे. एटीएस को संदेह है कि इन खेल मंचों का उपयोग भोले-भाले युवाओं को प्रभावित करने और उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने के लिए किया जा रहा था. पुसाद में फुटबॉल के प्रति आकर्षित मुस्लिम बच्चों और किशोरों की अच्छी खासी संख्या है, और इस क्षेत्र में कई स्थानीय क्लब भी संचालित हो रहे हैं.
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