केरल के सबरीमाला मंदिर से जुड़े बहुचर्चित सोना चोरी मामले ने अब खुलकर राजनीतिक रंग ले लिया है।मंदिर के तंत्री कंदारारू राजीवरू ने अपनी गिरफ्तारी को सीधे 2018 के महिला प्रवेश विवाद से जोड़ते हुए इसे बदले की कार्रवाई बताया है। कोल्लम विजिलेंस कोर्ट ने 41 दिन की हिरासत के बाद उन्हें जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि कथित अनियमितताओं में उनकी प्रत्यक्ष संलिप्तता का कोई प्रमाण रिकार्ड पर नहीं है।

तंत्री को 41 दिन बाद जमानत मिली

तंत्री का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद मासिक धर्म आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की कोशिशों के दौरान उन्होंने मंदिर की परंपराओं और अनुष्ठानों की रक्षा के लिए कड़ा रुख अपनाया था। उन्होंने राजनीतिक हस्तक्षेप स्वीकार करने से इनकार किया था और स्थापित परंपराओं से छेड़छाड़ होने पर पूजा-अर्चना न करने तक की चेतावनी दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर को सभी दिनों खुला रखने के प्रयासों का उन्होंने देवता के नित्य ब्रह्मचारी स्वरूप का हवाला देकर विरोध किया था।

झूठे मामलों में फंसाया गया

उनका आरोप है कि उसी रुख से कई प्रभावशाली लोग नाराज हो गए और अब उनकी छवि खराब करने तथा उन्हें अवैध लेनदेन में शामिल दिखाने के लिए झूठे मामलों में फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि एसआइटी ने उन्हें मुख्य आरोपित उन्नीकृष्णन पोट्टी से जोड़ने की कोशिश की, जबकि पोट्टी की नियुक्ति उन्होंने नहीं की थी। उधर, केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने कहा कि बिना उचित कारण तंत्री को 41 दिन जेल में रखना गंभीर मामला है और एसआइटी को इसका जवाब देना चाहिए।

इसी बीच, देवस्वोम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ए पद्मकुमार को भी श्रीकोविल सोना चोरी मामले में वैधानिक जमानत मिल गई, क्योंकि एसआइटी 90 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल नहीं कर सकी। हालांकि द्वारपालक सोना चोरी मामले में जमानत न मिलने से उनकी रिहाई फिलहाल नहीं होगी।

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