देहरादून. उत्तराखंड में आई आपदा को लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत का बयान सामने आया है. उनका कहना है कि ऐसे कुछ इलाके हैं जहां आपदा आई और वे वहां के लोगों से नहीं मिल पाए हैं. ऐसे में 20 मार्च के बाद वे उन इलाकों में जाकर प्रभावित लोगों से मुलाकात करेंगे. साथ ही उन्होंने धामी सरकार को भी हिदायत दी है कि सरकार विधानसभा के पटल पर आपदा पीड़ितों के लिए कार्य योजना रखे.
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हरीश रावत ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, किसी भी सरकार की संवेदनशीलता की परीक्षा आपदा पीड़ितों के प्रति उनकी संवेदनशीलता के पैमाने से होती है. राजनीतिक संवेदनशीलता का भी तकाजा है कि आप न केवल आपदा पीड़ितों से जुड़ें बल्कि उनके सवालों को बार-बार उकेरें. मैं आपदा के दौरान धराली, थराली, देहरादून के अगल-बगल के गांवों में आपदाग्रस्त क्षेत्रों में भी गया था और कनलगढ़ घाटी में बैसानी-पौसारी क्षेत्र में भी गया था, मगर रूद्रप्रयाग के छेना गाड़ क्षेत्र में नहीं जा पाया. तब से मैं लगातार इस आपदा ग्रस्त क्षेत्रों और पीड़ित लोगों की समस्याओं को उठा रहा हूं.
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आगे हरीश रावत ने कहा, बहुत दिनों से मैं महसूस कर रहा हूं कि मुझे एक बार फिर धराली से बैसानी तक वाया छेना गाड़, थराली होते हुए पहुंचना चाहिए. 20 मार्च के बाद मैं इन क्षेत्रों में पीड़ित परिवारों से मिलने जाऊंगा. इतना समय मैं सरकार को और देना चाहता हूं, ताकि वह विधानसभा के पटल पर उस कार्य योजना को रखें. जिसे वह आपदा पीड़ितों के कल्याण के लिए क्रियान्वित करना चाहती है. विधानसभा का सत्र उन्हें पुकार रहा है.
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