मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि भारत में अक्सर माता-पिता बच्चों को मेडिकल या इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिले की दौड़ में धकेल देते हैं, जबकि शिक्षा का असली उद्देश्य सीखना होना चाहिए। अदालत ने यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें एक छात्रा को 12वीं में गणित विषय अतिरिक्त विषय के रूप में देने की अनुमति देने की मांग की गई थी।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती ने कहा कि कई बार प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के दबाव में छात्र और अभिभावक विषयों में बदलाव कर देते हैं और बाद में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
अदालत ने मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को निर्देश दिया कि यदि यह साबित हो जाए कि छात्रा ने पहले गणित पढ़ा है, तो उसे मार्च 2026 में होने वाली सप्लीमेंट्री परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता ने अदालत में बताया कि उनकी बेटी ने कक्षा 11 में अंग्रेजी, जीवविज्ञान, भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित विषयों के साथ CBSE स्कूल में दाखिला लिया था। छात्रा ने पूरी कक्षा 11 और कक्षा 12 के कुछ समय तक गणित की पढ़ाई भी की।
हालांकि बाद में जब विषयों की जानकारी सीबीएसई को भेजी गई, तब सलाह दी गई कि NEET परीक्षा की बेहतर तैयारी के लिए कम अकादमिक विषयों पर ध्यान देना चाहिए। इसके चलते गणित की जगह शारीरिक शिक्षा विषय दर्ज कर दिया गया।
लेकिन जब छात्रा NEET परीक्षा में सफल नहीं हो पाई, तो परिवार ने सीबीएसई से अनुरोध किया कि उसे इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए गणित विषय अतिरिक्त विषय के रूप में देने की अनुमति दी जाए।]
CBSE ने क्यों किया इनकार?
सीबीएसई ने छात्रा के अनुरोध को 8 जनवरी को जारी आदेश में खारिज कर दिया। बोर्ड का कहना था कि उसके नियमों के अनुसार कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा देने के लिए किसी विषय को कक्षा 11 और 12 दोनों वर्षों तक पढ़ना जरूरी है।
बोर्ड ने यह भी कहा कि अतिरिक्त विषय तभी लिया जा सकता है जब छात्र ने उसे पूरे दो साल पढ़ा हो। चूंकि रिकॉर्ड में गणित दोनों वर्षों के लिए दर्ज नहीं था, इसलिए छात्रा को इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। सीबीएसई ने यह भी कहा कि जिस दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का हवाला दिया गया है, वह अलग परिस्थितियों से जुड़ा मामला था और उस पर अभी अपील लंबित है।
अदालत ने क्या कहा?
मद्रास हाईकोर्ट ने सीबीएसई के उपविधि 43 का अध्ययन किया, जिसमें बोर्ड परीक्षा पास करने के बाद अतिरिक्त विषय देने की व्यवस्था का उल्लेख है। अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड के अनुसार छात्रा ने 2023-2024 के शैक्षणिक वर्ष में कक्षा 11 के दौरान गणित की पढ़ाई की थी। इसलिए यह माना जा सकता है कि उसने विषय का अध्ययन किया था।
न्यायालय ने कहा कि कई बार शिक्षा व्यवस्था प्रवेश परीक्षाओं जैसे NEET या इंजीनियरिंग प्रवेश के दबाव से जुड़ जाती है, जिसके कारण अभिभावक जल्दबाजी में विषय बदल देते हैं और बाद में छात्रों को परेशानी होती है।
अदालत का अंतिम आदेश
अदालत ने कहा कि यदि छात्रा यह साबित कर देती है कि उसने कक्षा 11 और कक्षा 12 के कुछ समय तक गणित पढ़ा था, तो CBSE उसे अतिरिक्त विषय के रूप में गणित की परीक्षा देने की अनुमति दे। इसके लिए छात्रा को स्कूल रिकॉर्ड, नोटबुक और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज जैसे सबूत देने होंगे।
यदि CBSE इन सबूतों से संतुष्ट हो जाता है, तो उसे मार्च 2026 की सप्लीमेंट्री परीक्षा में बैठने दिया जाएगा। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए दिया गया है और इसे सामान्य नियम नहीं माना जाएगा।
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