गुजरात के कच्छ जिला में भुज के पास स्थित माधापार गांव का कल्याणेश्वर महादेव मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. यहां स्थित शिवलिंग अपनी अनोखी स्थिति के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखता है. मान्यता है कि यह शिवलिंग सदियों से टूटी अवस्था में ही मौजूद है और आज भी इसकी पूजा पूरे विधि-विधान के साथ की जाती है.

मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार यहां स्थापित शिवलिंग मंदिर के निर्माण से पहले से ही इसी स्वरूप में मौजूद था. समय के साथ कई शिवलिंगों के आकार में बदलाव आता है, लेकिन यहां का शिवलिंग प्रारंभ से ही टूटा हुआ बताया जाता है. इसके बावजूद भक्त इसे भगवान शिव का स्वरूप मानकर पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करते हैं और इस पर जल, दूध सहित अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं.
खंडित नहीं माना जाता शिवलिंग
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग किसी भी अवस्था में पूजनीय माना जाता है. इसलिए टूटा या चटका होने पर भी शिवलिंग की पूजा में कोई बाधा नहीं मानी जाती, जबकि अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों के लिए अलग नियम बताए जाते हैं.
पारंपरिक मान्यताएं
मंदिर को लेकर भक्तों के बीच कई मान्यताएं प्रचलित हैं. कहा जाता है कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल या दूध कहां जाता है, यह स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता. मंदिर परिसर में सांप दिखाई देने की बातें भी स्थानीय लोगों द्वारा कही जाती हैं.
पौराणिक कथा
कल्याणेश्वर महादेव मंदिर का संबंध पौराणिक कथाओं से भी जोड़ा जाता है. मान्यता है कि पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान यहां तपस्या की थी और शिवलिंग की स्थापना की थी. कुछ कथाओं में महाभारत के कर्ण और मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज के यहां पूजा करने का भी उल्लेख मिलता है. आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
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