हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह की मासिक शिवरात्रि आज 17 मार्च को मनाई जा रही है. यह पर्व महादेव की उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आने वाली यह मासिक शिवरात्रि भक्तों के लिए विशेष फल दायी मानी जाती है. श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव, पार्वती की पूजा, अभिषेक करते हैं. शास्त्रों में बताया गया है कि व्रत के दौरान नियमों का पालन करना आवश्यक होता है. श्रद्धा और अनुशासन के साथ किया गया व्रत ही पूर्ण फल देता है. मासिक शिवरात्रि का यह पावन दिन भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का उत्तम अवसर माना जाता है.

जीवन में आ रही बाधा होती है दूर

धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से व्रत और पूजा करने पर भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं. भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. विशेष रूप से दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं. कुंवारे लोगों को योग्य जीवनसाथी मिलने की भी मान्यता प्रचलित है.

अभिषेक और पूजा करने का शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि का आरंभ 17 मार्च सुबह 9.23 बजे से हुआ है और इसका समापन 18 मार्च सुबह 8. 25 बजे पर होगा. शिव पूजा के लिए निशिता काल का विशेष महत्व होता है, जो रात 12.5 बजे से 12.53 बजे तक रहेगा. इस दौरान की गई पूजा को अत्यंत शुभ माना जाता है.

जल अभिषेक का विशेष महत्व

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस दिन जलाभिषेक करने से ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. वहीं रुद्राष्टकम या अन्य शिव स्तोत्रों का पाठ करना भी बेहद फल दायी माना गया है. जिससे घर में सकारात्मक बढ़ती है.