इदरीश मोहम्मद, पन्ना। एमपी के पन्ना ​जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ कही जाने वाली आशा और आशा सहयोगिनी कार्यकर्ताओं का आक्रोश अब आर-पार की जंग में बदल गया है। अपनी 5 साल से लंबित मांगों को लेकर दिनभर प्रदर्शन करने के बाद, देर शाम कलेक्टर ऊषा परमार से हुई बातचीत बेनतीजा रही। कलेक्ट्रेट गेट के बाहर रातभर धरना दिया गया।

जिले की आशा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि प्रशासन की ओर से उन्हें कोई संतोषजनक ठोस आश्वासन नहीं मिला, जिससे नाराज होकर सैकड़ों महिलाएं कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर ही अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गई हैं। ​प्रदर्शनकारी महिलाओं ने किसी भी बात की परवाह न करते हुए कलेक्ट्रेट गेट के बाहर ही अपना डेरा डाल दिया है। संघ का कहना है कि वर्ष 2021 से अटका हुआ TBI (टीबी प्रोत्साहन राशि) का भुगतान, आयुष्मान कार्ड के लिए मोबाइल की उपलब्धता और ‘आशा कल्याणकारी योजना’ का लाभ मिलना उनका अधिकार है।

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​रात के सन्नाटे में कलेक्ट्रेट परिसर नारों से गूंज रहा है। धरने पर बैठी कार्यकर्ताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक उनकी जायज मांगों का निराकरण नहीं होता और लिखित आदेश जारी नहीं किए जाते, वे यहाँ से नहीं हटेंगी। प्रशासन के अड़ियल रवैये और कड़ाके की रात में सड़क पर बैठी इन महिला कोरोना योद्धाओं की स्थिति ने अब व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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