Bihar Politics: बिहार की सियासत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल सीएम नीतीश 30 मार्च को एमएलसी पद से इस्तीफा दे सकते हैं। दरअसल संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक कोई भी व्यक्ति एक साथ दो सदनों का सदस्य नहीं रह सकता। नीतीश कुमार हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में निर्वाचित हुए हैं। ऐसे में राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के 14 दिनों के अंदर उन्हें किसी एक पद (राज्यसभा या एमएलसी) को छोड़ना अनिवार्य होगा। ऐसे में माना जा रहा है कि वह 30 मार्च को एमएलसी पद से इस्तीफा दे देंगे।

12 अप्रैल को लेंगे राज्यसभा सदस्य की शपथ!

सूत्रों की माने तो नीतीश कुमार 12 अप्रैल को दिल्ली में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं। इसके तुरंत बाद 13 या 14 अप्रैल को पटना लौटकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं, जिसके साथ वह मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं।

बता दें कि भारतीय संविधान के अनुसार कोई विधान परिषद सदस्य या विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद भी कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री के पद पर बना रह सकता है, लेकिन यह केवल 6 महीने तक ही मान्य होता है। हालांकि, इन सभी घटनाक्रमों को लेकर अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं।


सम्राट बन सकते हैं बिहार के अगले ‘चौधरी’

नीतीश के राज्यसभा जाने और सीएम की कुर्सी छोड़ने के बाद बिहार की सियासत में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है। बिहार की राजनीति में जहां, पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री पद पर कब्जा होने की उम्मीद है। वहीं, डिप्टी सीएम पद जदयू के खाते में आ सकता है। सूत्रों की मानें तो सम्राट चौधरी बिहार के अगले मुख्यमंत्री हो सकते हैं। वहीं, जदयू से कोई नेता डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। हालांकि गृह विभाग किसके पास होता है। यह देखना भी दिलचस्प होगा, जो अभी डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के पास है। जदयू की नजर उसपर जरूर होगी।

नीतीश कुमार का राजनीतिक करियर

नीतीश कुमार के सियासी करियर में यह पहला मौका होगा, जब उनके जीवन में इतना लंबा उतार-चढ़ाव होने जा रहा है। बता देंकि नीतीश कुमार 1985 में हरनौत विधानसभा सीट से पहली बार विधायक चुने गए थे। इसके बाद वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हुए और कई बार सांसद भी चुने गए। केंद्र सरकार में उन्होंने रेल मंत्री सहित कई अहम पदों की भी जिम्मेदारी निभाई।

नीतीश कुमार 1989, 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में लोकसभा सांसद बने। वहीं, साल 2005 में नीतीश कुमार पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद से ही वे राज्य की राजनीति का केंद्र रहे और बिहार की सियासत उनके आस-पास ही रही। हालही में हुए 2025 में भी नीतीश कुमार के चेहरे पर एनडीए की प्रचंड बहुमत की सरकार बनी। हालांकि राज्यसभा चुनाव में निर्वाचित होने के बाद अब वे एक बार फिर दिल्ली की राजनीति की ओर हैं।

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