Dharm Desk – भारतीय समाज में शादी को एक पवित्र बंधन माना जाता है. इसमें सिर्फ दो लोग ही नहीं, बल्कि दो परिवार और कई बार दो अलग-अलग समाज भी जुड़ जाते हैं. यही वजह है कि शादी को सामाजिक और धार्मिक दोनों रूपों में मान्यता मिली हुई है. विवाह के बाद दो अलग परिवेश से आए लोग एक नई जिंदगी की शुरुआत करते हैं. जहां उनके रीति-रिवाज और सोच में फर्क होना आम बात है.

हिन्दू परंपरा में शादी की सबसे अहम रस्म अग्नि के सामने फेरे लेना होता है. बिना अग्नि को साक्षी माने विवाह अधूरा माना जाता है. दरअसल, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अग्नि को देवताओं तक संदेश पहुंचाने वाला माध्यम माना गया है. इसके यज्ञ में दी गई आहूति का 4 गुना फल वापस मिलता है. यही कारण है कि अग्नि को साक्षी मानकर लिए गए वचन सबसे ज्यादा पवित्र माने जाते हैं.

जानकार बताते हैं कि अग्नि केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि शुद्धता और ऊर्जा का भी रूप होती है. कहा जाता है कि यज्ञ में दी गई आहुति को अग्नि कई गुना करके लौटाती है, इसी वजह से वर-वधू उसके सामने सात फेरे लेकर अपने रिश्ते को मजबूत करने का संकल्प लेते हैं. शास्त्रों में विवाह के आठ प्रकार बताए गए हैं, जिनमें चार को श्रेष्ठ माना गया है.

हालांकि आज के समय में ज्यादातर शादियां पारंपरिक तरीके से ही होती हैं. सात फेरों को अटूट विश्वास का प्रतीक माना जाता है, जिनमें वर-वधू एक-दूसरे का साथ निभाने की कसम खाते हैं. पहले चार फेरों में वधू आगे रहती है, जबकि बाद के फेरों में वर आगे चलता है. हर फेरे के साथ मंत्रोच्चारण होता है, जिससे माहौल और भी धार्मिक बन जाता है. अग्नि के सामने फेरे लेना सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि भगवान को साक्षी मानकर जीवन की नई शुरुआत करने जैसा माना जाता है. यही वजह है कि समय बदलने के बावजूद ये परंपरा आज भी वैसी ही बनी हुई है.