कुंदन कुमार/ पटना। बिहार की सियासत में एक युग का अंत और नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना से दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं, जहां वे राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इस यात्रा के साथ ही बिहार में सत्ता हस्तांतरण की पटकथा लिखी जा चुकी है। जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने स्पष्ट कर दिया है कि खरमास समाप्त होते ही नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे देंगे।
दिल्ली में अहम बैठकें और शपथ ग्रहण
तय कार्यक्रम के अनुसार, नीतीश कुमार 10 अप्रैल को दोपहर 12:15 बजे राज्यसभा सदस्य की शपथ लेंगे। दिल्ली प्रवास के दौरान वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर बिहार की नई सरकार के स्वरूप पर चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री आज शाम दिल्ली में जेडीयू राष्ट्रीय परिषद और कार्यकारिणी के नेताओं के साथ भी बैठक करेंगे, जिसमें पार्टी के भविष्य और उनके पुत्र निशांत कुमार की भूमिका पर अंतिम मुहर लगेगी।
निशांत कुमार का राजनीतिक उदय और नया मंत्रिमंडल
इस बदलाव की सबसे बड़ी खबर नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का राजनीति में प्रवेश है। सूत्रों के अनुसार, नई सरकार में जेडीयू को पहली बार दो उप-मुख्यमंत्री पद मिल सकते हैं, जिनमें से एक पद निशांत कुमार को दिया जाना लगभग तय है। इसके अलावा, विधानसभा स्पीकर का पद भी जेडीयू के पास रहने की संभावना है।
सत्ता का नया समीकरण और संभावित समय सीमा
- बिहार में नई सरकार का गठन 15 या 16 अप्रैल को हो सकता है। नए समीकरणों के तहत:
- 13 अप्रैल: कैबिनेट की आखिरी बैठक।
- 14 अप्रैल: नीतीश कुमार का इस्तीफा और एनडीए विधायक दल की बैठक।
- मंत्रिमंडल फॉर्मूला: नई सरकार में मुख्यमंत्री भाजपा का होगा। जेडीयू के 13, भाजपा के 10 (मुख्यमंत्री सहित), चिराग पासवान की पार्टी (LJPR) के 2, जबकि HAM और RLM के 1-1 नेता मंत्री बन सकते हैं।
बीजेपी नेता नितिन नवीन ने स्पष्ट किया है कि यह सब नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में हो रहा है, जो बिहार की राजनीति में एक बड़े “पावर शिफ्ट” का संकेत है।
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