Dharm News : शनि भले ही सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह माने जाते हैं, लेकिन जब उनकी चाल बदलती है तो इसका असर व्यापक रूप से महसूस होता है. 13 मार्च को शनि मीन राशि में अस्त हो जाएंगे. 40 दिन बाद 22 अप्रैल को 4:49 पर उदित होंगे.

हर किसी के लिए नहीं होता यह समय खराब

ज्योतिष के अनुसार शनि का अस्त होना हर किसी के लिए नकारात्मक नहीं होता. कई लोगों के लिए यह समय राहत देने वाला साबित हो सकता है. खासतौर पर जिन कार्यों में रुकावट आ रही थी, उनमें दोबारा गति देखने को मिल सकती है और स्थिति पहले से बेहतर बन सकती है.

साढ़ेसाती और ढैय्या के लिए समय महत्वपूर्ण

इस समय शनि की साढ़ेसाती कुंभ, मीन और मेष राशि पर चल रही है, जबकि सिंह और धनु राशि ढैय्या के प्रभाव में हैं. कुंभ पर अंतिम चरण, मीन पर दूसरा और मेष पर पहला चरण प्रभावी है, जिससे इन राशियों के लिए यह समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है. लगभग 40 दिनों तक शनि के अस्त रहने से साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव में कमी आएगी. इस दौरान जीवन में कुछ सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं. मानसिक दबाव भी पहले की तुलना में कम हो सकता है.

इस दौरान सावधानी बरतना जरूरी है. शनि की दृष्टि कमजोर रहने से बड़े फैसले जल्दबाजी में न लें. विशेष रूप से निवेश और कानूनी मामलों में सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी जाती है.

  1. मेष राशि

शनि बारहवें भाव में अस्त होकर आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत दे सकते हैं. साढ़ेसाती का पहला चरण होने से सतर्कता जरूरी है, लेकिन अटके कामों में धीरे-धीरे गति भी देखने को मिल सकती है.

  1. वृश्चिक राशि

पांचवें भाव में शनि के अस्त होने से करियर और कारोबार में आगे बढ़ने के अवसर बन सकते हैं. इस समय प्रमोशन या व्यापार में लाभ मिलने की संभावना भी बन रही है.

  1. कुंभ राशि

दूसरे भाव में शनि के अस्त होने से आय के नए रास्ते खुल सकते हैं. साढ़ेसाती के अंतिम चरण में राहत मिल सकती है, लेकिन किसी भी बड़े फैसले से पहले विचार करना जरूरी रहेगा.

4. मीन राशि

शनि आपकी ही राशि में अस्त हो रहे हैं, जिससे साढ़ेसाती का प्रभाव कुछ कम हो सकता है. इस दौरान सेहत में सुधार के संकेत मिल सकते हैं और मानसिक स्थिति भी पहले से संतुलित रह सकती है.