पटना। बिहार की राजनीति में मचे उथल-पुथल के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे पर तीखा हमला बोला है। सदाकत आश्रम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि बिहार में लोकतंत्र अब केवल नाम का रह गया है और इसकी जड़ें खोखली हो चुकी हैं।
गलत समय पर लिया गया निर्णय
राजेश राम ने इस बात पर गहरी आपत्ति जताई कि नीतीश कुमार ने अपने इस्तीफे के लिए उस दिन को चुना, जब पूरा देश संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती मना रहा है। उन्होंने कहा, जिस दिन बाबा साहेब ने हमें लोकतंत्र को मजबूत करने वाला संविधान दिया, उसी दिन मुख्यमंत्री का इस्तीफा देना संवैधानिक मूल्यों के प्रति उनकी उदासीनता को दर्शाता है। कम से कम आज के दिन उन्हें इस राजनीतिक उठापटक से बचना चाहिए था।
संवैधानिक मूल्यों का ह्रास और परिवारवाद पर वार
कांग्रेस अध्यक्ष ने वर्तमान सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मंत्रिपरिषद और मुख्यमंत्री की जो तस्वीर सामने आ रही है, वह चुनी हुई जन-प्रतिनिधि प्रणाली का अपमान है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग कल तक परिवारवाद के खिलाफ नारे लगा रहे थे, आज वे खुद उसी जाल में उलझ कर रह गए हैं। उनके अनुसार, बिहार में सत्ता का यह खेल संविधान की मूल आत्मा को चोट पहुंचा रहा है।
सदाकत आश्रम में भीम शक्ति संवाद का आयोजन
अंबेडकर जयंती के अवसर पर पटना स्थित कांग्रेस मुख्यालय, सदाकत आश्रम में भीम शक्ति संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और वरिष्ठ नेता मदन मोहन झा ने बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर और दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। राजेश राम ने उल्लेख किया कि बाबा साहेब का संविधान ही वह सूत्र है जिसने पूरे देश को एक धागे में पिरोया है। उन्होंने आर्टिकल 12 से 35 (मौलिक अधिकार) का जिक्र करते हुए अभिव्यक्ति, रहन-सहन और वैचारिक स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया।
राहुल गांधी के नेतृत्व में नई लीडरशिप का उदय
राजेश राम ने कहा कि राहुल गांधी के विजन के अनुरूप बिहार कांग्रेस अब युवाओं और थर्ड जनरेशन के नेताओं को आगे बढ़ा रही है। बाबा साहेब के उस संदेश को याद किया गया जिसमें उन्होंने आर्थिक मजबूती और राजनीति में सक्रिय भागीदारी को विकास का आधार बताया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अब विधानसभा और लोकसभा में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित कर एक नई लीडरशिप तैयार करने में जुटी है, ताकि लोकतंत्र की नींव को फिर से सींचा जा सके।
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