पटना। बिहार की राजनीति में एक नया इतिहास रचा जा रहा है। 58 वर्षीय सम्राट चौधरी, जिन्हें उनके परिवार और करीबी लोग प्यार से ‘गुल्लू’ बुलाते हैं, बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभालने जा रहे हैं। यह क्षण विशेष इसलिए भी है क्योंकि वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से बिहार के पहले मुख्यमंत्री होंगे।

​कुशवाहा परिवार से सत्ता के शिखर तक

​1968 में एक प्रभावशाली कुशवाहा (कोइरी) परिवार में जन्मे सम्राट चौधरी का राजनीतिक उत्कर्ष किसी मिसाल से कम नहीं है। महज 10 वर्षों के अपने सक्रिय भाजपा कार्यकाल में उन्होंने प्रदेश उपाध्यक्ष से लेकर एमएलसी और फिर प्रदेश अध्यक्ष तक का सफर तय किया। मंगलवार को उन्हें लगातार दूसरी बार भाजपा विधानमंडल दल का नेता चुना गया, जो उनके नेतृत्व पर पार्टी के अटूट भरोसे को दर्शाता है।

​विरासत में मिली राजनीति और प्रशासनिक अनुभव

​सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता, शकुनी चौधरी, बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री और सांसद रह चुके हैं। सम्राट और उनके पिता दोनों ने कभी लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व वाली राजद सरकार में भी मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली थी। उनकी दिवंगत माता भी विधायक रह चुकी हैं, जिससे स्पष्ट है कि जनसेवा उनके रक्त में है।

​नितीश सरकार में बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड

​2006 के बाद से सम्राट चौधरी का कद लगातार बढ़ता गया। वे नीतीश कुमार और जीतन राम मांझी की सरकारों में विभिन्न पदों पर रहे। उनके नाम नीतीश सरकार के 20 वर्षों के कार्यकाल में पहले गृह मंत्री बनने का गौरवशाली रिकॉर्ड भी दर्ज है। वे परबत्ता और तारापुर से विधायक रहने के साथ-साथ विधान पार्षद की भूमिका में भी रहे हैं।

​मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा

​उनकी शैक्षणिक यात्रा भी उतनी ही प्रेरणादायक है जितनी उनकी राजनीति। बिहार से निकलकर उन्होंने दक्षिण भारत का रुख किया और तमिलनाडु के प्रसिद्ध मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की। एक हिंदी भाषी राज्य से जाकर दक्षिण के प्रतिष्ठित संस्थान से डिग्री हासिल करना उनकी दूरदर्शिता और सीखने की ललक को दर्शाता है।
​आज ‘गुल्लू’ का मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचना न केवल उनके परिवार के लिए गर्व की बात है, बल्कि बिहार भाजपा के लिए एक नए युग की शुरुआत है।