नई दिल्ली। राजस्थान लोक परीक्षा घोटाले से जुड़े डमी कैंडिडेट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए निलंबित RAS अधिकारी हनुमानाराम की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया।

राज्य सरकार के कड़े विरोध के बाद खारिज हुई जमानत

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पहले नोटिस जारी किया था, लेकिन राजस्थान सरकार ने आरोपी की जमानत का कड़ा विरोध किया। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि अगर आरोपी राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) अधिकारी बना रहता, तो यह राज्य को बेच देता। आरोपी का यह कृत्य लोक प्रशासन की नींव और प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सीधा प्रहार करता है। यदि RAS जैसे जिम्मेदार पद पर चयनित व्यक्ति ऐसे कार्यों में लिप्त पाया जाता है, तो वह पूरे तंत्र के लिए गंभीर खतरा है। ऐसे व्यक्ति को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

टॉपर रह चुका है आरोपी

चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी पढ़ाई में काफी तेज माना जाता था। उसने RAS 2018 परीक्षा में 22वीं रैंक हासिल की थी और एक अन्य परीक्षा में दूसरी रैंक भी प्राप्त की थी। इसके बावजूद उस पर संगठित पेपर लीक गिरोह से जुड़े होने के गंभीर आरोप लगे हैं।

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जांच में सामने आई गहरी संलिप्तता

शुरुआती एफआईआर में आरोपी का नाम शामिल नहीं था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर उसकी भूमिका उजागर हुई। इससे संकेत मिलता है कि वह किसी बड़े परीक्षा रैकेट का हिस्सा था और लगातार इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहा।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि अगर ऐसा व्यक्ति जिम्मेदार पद पर बना रहता, तो वह “राज्य को बेच देता।” सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि आरोपी का यह कृत्य एक बार की गलती नहीं बल्कि लगातार किया गया अपराध है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता के लिए गंभीर खतरा है। कोर्ट ने साफ किया कि ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है, ताकि भर्ती प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता बनी रहे और भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके।

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