रायपुर। “करउँ सोइ जेहि होइ सब काहा, मोरें मन प्रगट नहिं दाहा॥” रामचरित मानस की इस चौपाई में गोस्वामी तुलसीदास ने कहा है कि मन में किसी के प्रति द्वेष रखे बिना वही कार्य करना चाहिए, जिससे सबका भला हो। सर्वजन हिताय और निष्पक्ष नेतृत्व को दर्शाती है।
यह एक गहरा और प्रतीकात्मक संयोग है कि अंतरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस, 1 मई को ही जनसेवा और संघर्ष की मिसाल बने, छत्तीसगढ़ में जन-जन के दुलारे नेता बृजमोहन अग्रवाल का जन्मदिवस भी है।

आज जहां एक ओर दुनिया श्रमिकों के अधिकार, सम्मान और उनके योगदान को नमन कर रही है वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ की राजनीति में श्रम, संघर्ष और संगठन की ताकत को जीवन में उतारने वाले एक जननायक का जन्मदिन पूरे जोश-खरोश और प्यार से मनाया जा रहा है। जिस तरह परिश्रम का सम्मान और न्यायपूर्ण व्यवस्था की स्थापना मज़दूर दिवस की मूल भावना है। यही भावना बृजमोहन अग्रवाल के जीवन और उनके राजनीतिक यात्रा में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

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रायपुर के रामसागर पारा में एक साधारण व्यवसायिक परिवार में जन्मे बृजमोहन को समाजसेवा के संस्कार बचपन से ही मिल गए थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर उन्होंने नेतृत्व और जनहित के लिए संघर्ष करना सीखा। आरम्भ से ही उनकी राजनीतिक यात्रा जन संघर्ष की ख़ातिर रही उन्हें सत्ता सौपने का काम जनता के स्नेह ने किया। वे चाहे किसी भी राजनीतिक पद पर रहे हों जनसेवा को उन्होंने एक निरंतर अभियान बनाए रखा। जनता के दिलों में गहरी पैठ रखने वाले मोहन भैया छात्र राजनीति से लेकर आठ बार विधायक और फिर सांसद बनने तक के सफर में कभी पराजय का मुंह नही देखा। बृजमोहन अग्रवाल एक तरह से “श्रम की राजनीति” करते हैं जहां निरंतर प्रयास, जनता से संवाद और जमीनी जुड़ाव उनको हमेशा अव्वल बना कर रखता है।

जिस तरह ‘मज़दूर दिवस’ हमें याद दिलाता है कि समाज का हर निर्माण श्रमिकों के हाथों से होता है ठीक उसी तर्ज़ में किसी राज्य का विकास भी लागू की गई योजनाओं से नहीं बल्कि उसे अमल में लाने वाले नेतृत्व के समर्पण से होता है। बृजमोहन अग्रवाल के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ में जिस तरह बेसिक इंफ़्रास्ट्रक्चर, खेल, शिक्षा, पर्यटन और कृषि के क्षेत्र में विकास हुआ वह इस बात की गवाही है कि यदि नेतृत्व श्रमशील हो तो सुखद परिणाम स्वतः सामने आते हैं।

बृजमोहन अग्रवाल के नेतृत्व में रायपुर का जो कायाकल्प हुआ उसे कभी भुलाया नही जा सकेगा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम, पुरखौती मुक्तांगन और महादेव घाट का विकास यह सब महज़ निर्माण कार्य नहीं हैं बल्कि यह उस सोच का प्रतीक हैं जो एक शहर को पहचान दिलाने के लिए ज़रूरी होता है। उन्होंने उस “मज़दूर भावना” से रायपुर को संवारा जिसमें हर ईंट, हर पत्थर एक बड़े सपने को आकार देता है।

कृषि क्षेत्र में भी बृजमोहन अग्रवाल की उपलब्धियां उल्लेखनीय रही। लगातार तीन साल तक छत्तीसगढ़ को कृषि कर्मण पुरस्कार दिलाना एक बड़ी प्रशासनिक सफलता के साथ ही साथ किसानों के श्रम के प्रति सम्मान भी है। उनका यह दृष्टिकोण भी, मज़दूर दिवस की मूल भावना से मेल खाने वाला है जिसमें श्रम को केवल मेहनत नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का आधार माना जाता है। राजनीति में आरम्भ से ही बृजमोहन का संघर्ष किसी मज़दूर की मेहनत से कम नहीं रहा। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की नीतियों के विरोध में काला झंडा दिखाने से लेकर जेल जाने तक उन्होंने हमेशा अपने सिद्धांतों पर अडिग रहकर संघर्ष किया है। उनका यही जुझारूपन उन्हें एक सामान्य नेता से अलग बनाता है।

आज तकनीकी प्रगति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन के इस दौर में बृजमोहन अग्रवाल जैसे आत्मीय नेता जो ज़मीनी हकीकत को समझते हैं उनका महत्व और भी बध जाता है। सत्ता और संगठन के बीच संतुलन बनाए रखने में बृजमोहन अग्रवाल हमेशा से निपूर्ण रहे यही कारण है कि वे केवल एक राजनेता नहीं बल्कि एक कुशल संगठनकर्ता के रूप में भी जाने जाते हैं।बृजमोहन अग्रवाल की कार्यशैली और सदव्यवहार ने उनको बहुत बड़ा बनाया। युवा पीढ़ी को राजनीति में सकारात्मक दिशा देने का उनका प्रयास सदैव स्मरणीय है उन्होंने हमेशा यही सिखाया कि “सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। विजयश्री निरंतर मेहनत, संघर्ष और समर्पण का ही परिणाम होता है।”

अपनी ऊर्जा से आज भी युवा महसूस होने वाले वरिष्ठ जन नायक बृजमोहन अग्रवाल को किशोर भी भैया पुकारते हैं उनका जीवन इसी संदेश का जीवंत उदाहरण है कि “श्रम ही सम्मान है और सेवा ही सबसे बड़ा धर्म समाज का हर व्यक्ति चाहे वह किसान हो, मजदूर हो या नेता सबका योगदान समान रूप से महत्वपूर्ण होता है।”

अंत में हम बृजमोहन अग्रवाल के अब तक के संघर्षपूर्ण, कर्मठ और जनहितकारी जीवन से प्रेरणा लेते हुए उन्हें जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि उन्हें उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और दिव्य ऊर्जा प्रदान करें, ताकि वे आने वाले समय में भी जनकल्याण के नए आयाम स्थापित करते हुए प्रदेश और राष्ट्र की सेवा में निरंतर अग्रसर रहें। इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ उन्हें पुनः जन्मदिन की हार्दिक बधाई।


लेखक – संदीप अखिल, सलाहकार संपादक, न्यूज़ 24 एमपीसीजी /लल्लूराम डॉट कॉम