दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम शुक्रवार को 13 साल बाद सूरत आगमन हुआ। यहां आश्रम में अनुयायियों ने उसका ढोल-नगाड़ों से भव्य स्वागत किया। आश्रम में लोग हाथों में दीपक लेकर दर्शन के लिए खड़े हुए थे। सूरत पहुंचते ही आसाराम ने अपने जहांगीरपुरा आश्रम का दौरा किया। इस दौरान उनके स्वागत में आश्रम के बाहर सड़कों पर हजारों की संख्या में लोग हाथों में दीपक लेकर खड़े हुए थे। स्वागत के लिए पूरे आश्रम को रोशनी से सजाया गया था और सड़कों पर रंगोली भी बनाई गई थी। आसाराम अगले तीन दिनों तक आयुर्वेद ट्रीटमेंट के लिए आश्रम में ही रहेगा। आसाराम को हाल ही में स्वास्थ्य कारणों से गुजरात हाईकोर्ट ने सशर्त जमानत दी है।

आसाराम के आगमन की खबर मिलते ही सूरत और दक्षिण गुजरात से ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से भी सैकड़ों श्रद्धालु बसों में सूरत के जहांगीरपुरा आश्रम पहुंचे हैं। आश्रम के अंदर और बाहर अनुयायियों की भारी भीड़ के चलते पुलिस की टीमें भी आश्रम के बाहर तैनात कर दी गई हैं।

सूरत के सरकारी हॉस्पिटल में हुई थी पूजा-आरती

इससे पहले एक ऐसा ही मामला करीब तीन महीने पहले भी सूरत शहर में देखने को मिला था। सिविल हॉस्पिटल में आसाराम समर्थकों के एक समूह ने मेन गेट पर आसाराम की एक फोटो रखकर पूजा-आरती की थी। आरती के दौरान मंत्रोच्चार और भजन हुए। आरती में शिशु रोग विभाग की वरिष्ठ डॉक्टर जिगिशा पटाडिया, नर्स और सुरक्षाकर्मी भी शामिल हुए थे।

रेप केस में सजा काट रहे आसाराम बापू

आसाराम बापू अगस्त 2013 से जेल में हैं, जब उन पर एक 16 वर्षीय स्कूली छात्रा के साथ बलात्कार का आरोप लगा था, जिसके माता-पिता आसाराम बापू के भक्त थे। कुछ महीने बाद, उन पर और उनके बेटे नारायण साईं पर गुजरात के सूरत स्थित अपने आश्रम में दो बहनों के साथ बलात्कार का आरोप लगा।

जनवरी 2023 में, गांधीनगर की एक सत्र अदालत ने सूरत आश्रम में 2013 में एक महिला शिष्या के साथ बलात्कार के मामले में आसाराम को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया। इस साल की शुरुआत में, गुजरात हाई कोर्ट ने बलात्कार के एक मामले में चिकित्सा आधार पर उनकी ज़मानत 21 अगस्त तक बढ़ा दी थी।

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