Kaila Devi Lakhi Mela 2026: उत्तर भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री कैलादेवी का चैत्र लक्खी मेला आज सोमवार, 16 मार्च से पूरे वैभव के साथ शुरू हो गया है। 1 अप्रैल तक चलने वाले इस विशाल मेले के पहले दिन ही हिण्डौन से कैलादेवी तक का पूरा मार्ग भक्ति के सागर में डूब गया है। दिल्ली, हरियाणा, यूपी और एमपी समेत कई राज्यों से लाखों पैदल यात्री ‘कैला मैया’ के जयकारे लगाते हुए दरबार की ओर बढ़ रहे हैं।

मेले की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस बार 50 से 70 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। यात्रियों की सेवा के लिए जगह-जगह निशुल्क भंडारे, चिकित्सा शिविर और ठहरने के इंतजाम किए गए हैं। वहीं, राजस्थान रोडवेज ने भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए 300 से अधिक मेला स्पेशल बसें दौड़ाई हैं।

प्रशासन ने इस बार सुरक्षा में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। डीएसपी और एएसपी स्तर के अधिकारियों की निगरानी में 1300 पुलिस व होमगार्ड जवान मोर्चा संभाल रहे हैं। पूरे मेला क्षेत्र को 320 सीसीटीवी कैमरों की नजर में रखा गया है। मंदिर ट्रस्ट ने भी अपनी ओर से 350 अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए हैं ताकि किसी भी श्रद्धालु को कोई परेशानी न हो।

भक्तों के लिए क्या है खास?

  • दिव्यांग और बुजुर्गों के लिए व्हीलचेयर, रैंप और ई-रिक्शा की सुविधा।
  • हीटप्रूफ टाइल्स वाला परिक्रमा मार्ग, 200 से अधिक सफाई कर्मी।
  • 25 जल प्याऊ, आरओ प्लांट और कालीसिल नदी घाटों पर 12 गोताखोरों की तैनाती।
  • मेला क्षेत्र में प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लागू।

कलेक्टर ने संभाली कमान

मेले के सुचारू संचालन को लेकर जिला कलेक्टर नीलाभ सक्सेना काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं। रविवार को उन्होंने स्वयं बाइक से करौली से कैलादेवी मार्ग तक का जायजा लिया। उन्होंने साफ निर्देश दिए हैं कि चिकित्सा से लेकर पेयजल तक की सभी व्यवस्थाएं समन्वय के साथ चलनी चाहिए। प्रशासन ने मेला मजिस्ट्रेट और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी है, जो चप्पे-चप्पे पर नजर रख रहे हैं।

गौरतलब है कि कैलादेवी का यह लक्खी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था का वह महाकुंभ है जो राज्यों की सीमाओं को तोड़कर लाखों लोगों को एक सूत्र में पिरोता है।

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