अंबेडकरनगर. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ माता की रक्षा के ‘धर्मयुद्ध यात्रा’ शुरू करने को लेकर बड़ा बयान दिया है. इस दौरान उन्होंने संतों की भूमिका पर भी बड़ा सवाल किया. साथ ही उन्होंने कहा, हमने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 40 दिन का समय दिया था, जो कोई गड़बडी हो तो 40 दिन में सुधार लीजिए. लेकिन उन्होंने उस 40 दिनों का उपयोग गौ-माता की रक्षा के लिए नहीं किया, इसीलिए ये युद्ध हमको शुरू करना पड़ा है.
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आगे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, गौमाता की रक्षा इस देश के सभी नेता को करनी ही पड़ेगी. चाहे फिर वह किसी भी पार्टी का नेता क्यों न हो. ये हिंदुओं का देश है, हम हिंदू इसके लिए तैयार नहीं हैं कि हमारी ही माता को काट-काटकर डॉलर के लिए बेचा जाए.
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आगे उन्होंने कहा, इस समय देश में संत 2 तरह के हो गए हैं. एक सरकारी और दूसरा असरकारी. हम असरकारी संतों में अपने आप को रखना चाहते हैं. सरकारी संतों में नहीं रखना चाहते. सरकारी संतों से भला नहीं होने वाला है. सरकारी संत अन्याय और अत्याचार होता देख रहे हैं, लेकिन उसके बाद भी नहीं बोल रहे हैं. उसके बाद भी उनके मुंह से सत्ता के पक्ष में बात निकलती है. अगर साधु संत में सरकार के स्वर में स्वर मिलाने लगेंगे तो जनता का क्या होगा. सरकारी संतों से सनातन धर्म के लोगों को उम्मीद नहीं है. असहकारी संतों से उम्मीद है.
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