अविनाश श्रीवास्तव/सासाराम। बिहार में पंचायत चुनाव की आहट के बीच सासाराम सदर प्रखंड की राजनीति शनिवार को उस समय गरमा गई जब प्रखंड प्रमुख रूपा देवी के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव पूरी तरह विफल हो गया। विपक्षी खेमे की ओर से बिछाई गई बिसात पर रूपा देवी भारी पड़ीं और अंततः उनकी कुर्सी सुरक्षित रह गई।
विपक्ष की अनुपस्थिति बनी चर्चा का विषय
मामले की पृष्ठभूमि यह है कि प्रखंड के कुल आठ पंचायत समिति सदस्यों में से तीन सदस्यों ने वर्तमान प्रमुख रूपा देवी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए आवेदन दिया था। प्रशासन द्वारा इस प्रस्ताव पर चर्चा और वोटिंग के लिए शनिवार की तिथि निर्धारित की गई थी। राजनीतिक गलियारों में इस बात की प्रबल संभावना जताई जा रही थी कि आज प्रमुख के भाग्य का फैसला होगा।
निर्धारित समय पर नहीं पहुंचा कोई सदस्य
हैरानी की बात यह रही कि जिस अविश्वास प्रस्ताव को लेकर इतनी गहमागहमी थी उसके समर्थन में निर्धारित समय तक एक भी सदस्य सदन में उपस्थित नहीं हुआ। यहां तक कि जिन सदस्यों ने हस्ताक्षर कर आवेदन दिया था वे भी नदारद रहे। नियमानुसार कोरम पूरा न होने और विपक्ष की अनुपस्थिति के कारण अविश्वास प्रस्ताव को स्वतः खारिज कर दिया गया।
आगामी चुनाव और सियासी मायने
बता दें कि कुछ ही महीनों बाद बिहार में पंचायत चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले अपनी ताकत दिखाने की यह कोशिश विपक्ष के लिए काफी महंगी साबित हुई है। रूपा देवी का पद पर बने रहना उनके समर्थकों के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है। प्रस्ताव खारिज होने के बाद उनके समर्थकों में खुशी की लहर है।
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