कुंदन कुमार/​पटना। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय के बाहर आज उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब कार्यालय के बाहर लगे कुछ विवादित पोस्टरों को भाजपा कार्यकर्ताओं और सुरक्षा गार्डों द्वारा फाड़ दिया गया। यह पोस्टर वाल्मीकि संघ के कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए थे, जिसमें सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की गई थी।

​सम्राट को मुख्यमंत्री बनाने की मांग से उपजा विवाद

​वाल्मीकि संघ की ओर से लगाए गए इन पोस्टरों में स्पष्ट रूप से सम्राट चौधरी को बिहार के अगले मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में पेश करने की अपील की गई थी। जैसे ही ये पोस्टर भाजपा मुख्यालय की दीवारों पर दिखाई दिए, कार्यालय के भीतर मौजूद कार्यकर्ताओं और गार्डों ने तुरंत एक्शन लिया। देखते ही देखते सभी पोस्टरों को उखाड़कर फाड़ दिया गया और कूड़े के ढेर में फेंक दिया गया।

​भीतर का असंतोष या अनुशासन का डंडा?

​इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसके इशारे पर इन पोस्टरों को हटाया गया? भाजपा के भीतर एक धड़ा इसे अनुशासनहीनता मान रहा है, क्योंकि पार्टी ने वर्तमान में मुख्यमंत्री पद के लिए आधिकारिक तौर पर किसी नाम का ऐलान नहीं किया है। वहीं, वाल्मीकि संघ के समर्थकों में इस घटना को लेकर गहरा रोष है।

​खड़े हुए गंभीर सवाल

​पोस्टर फटने के बाद अब यह सवाल सबसे बड़ा है: क्या यह कदम किसी बड़े नेता के निर्देश पर उठाया गया है या कार्यकर्ताओं ने खुद ही यह फैसला लिया? क्या भाजपा के अंदरूनी खेमे में नेतृत्व को लेकर कोई खींचतान चल रही है? फिलहाल, भाजपा की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पार्टी दफ्तर के बाहर फटे हुए पोस्टर बिहार की राजनीति में एक नई हलचल का संकेत दे रहे हैं।