पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट तेज है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा वर्तमान में दोहरे संकट से जूझ रहे हैं। एक तरफ भाजपा की ओर से पार्टी विलय का कथित दबाव है, तो दूसरी तरफ उनके अपने ही विधायकों के बागी सुर पार्टी के अस्तित्व को खतरे में डाल रहे हैं।
दबाव की राजनीति: मंत्री पद के बदले विलय की शर्त?
सियासी गलियारों में चर्चा है कि भाजपा ने उपेंद्र कुशवाहा के सामने एक कठिन शर्त रखी है। दावा किया जा रहा है कि यदि कुशवाहा अपनी पार्टी का विलय भाजपा में करते हैं, तभी उनके बेटे दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाया जाएगा। 20 नवंबर 2025 को जब एनडीए सरकार का गठन हुआ था, तब दीपक प्रकाश को बिना किसी सदन की सदस्यता के मंत्री बनाया गया था। योजना थी कि मंगल पांडेय द्वारा खाली की गई एमएलसी सीट पर दीपक को भेजा जाएगा, लेकिन समीकरण अचानक बदल गए।
भाजपा ने मंगल पांडेय की सीट पर अरविंद शर्मा को उम्मीदवार बनाकर कुशवाहा को स्पष्ट संकेत दे दिया है। अब यह माना जा रहा है कि जून में खाली होने वाली विधान परिषद की 9 सीटों में से एक पर दीपक प्रकाश को तभी मौका मिलेगा, जब कुशवाहा विलय के लिए तैयार होंगे।
विधायकों का विद्रोह और आंतरिक कलह
RLM के भीतर भी स्थिति सामान्य नहीं है। पार्टी के 4 विधायकों में से एक बड़ा धड़ा भाजपा में शामिल होने का इच्छुक बताया जा रहा है। इसका संकेत हाल ही में मधुबनी विधायक माधव आनंद के पारिवारिक कार्यक्रम में देखने को मिला। पटना में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और नीतीश कुमार समेत एनडीए के तमाम दिग्गज पहुंचे, लेकिन अपनी ही पार्टी के विधायक के कार्यक्रम से उपेंद्र कुशवाहा नदारद रहे। हालांकि, उनकी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा और बेटा दीपक प्रकाश वहां मौजूद थे। कुशवाहा की यह अनुपस्थिति पार्टी के भीतर चल रही खींचतान की तस्दीक करती है।
कुशवाहा की चुप्पी और भविष्य का रास्ता
जब इस दबाव के बारे में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह से पूछा गया, तो उन्होंने मामले की जानकारी होने से इनकार कर दिया। हालांकि, नाम न छापने की शर्त पर एक अन्य विधायक ने स्वीकार किया कि विलय को लेकर दो दौर की बातचीत हो चुकी है। फिलहाल उपेंद्र कुशवाहा ने इस पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साध रखी है। सवाल यह है कि क्या वे अपने बेटे के राजनीतिक करियर को बचाने के लिए अपनी पार्टी की कुर्बानी देंगे, या एक बार फिर नए रास्ते की तलाश करेंगे?
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