देहरादून. धौलास प्रकरण को लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत ने धामी सरकार पर हमला बोला है. हरीश रावत ने कहा, धौलास भू प्रकरण से दो बातें जगजाहिर हो गईं. भाजपा मुस्लिम यूनिवर्सिटी को लेकर लगातार झूठ बोलती आ रही है. इस भूखंड के भू-उपयोग बदलने के मामले में जबरदस्त घोटाला हुआ है. यदि आप पिछले सात-आठ सालों में भूमि घोटालों पर गौर करिए, चाहे वह हरिद्वार के भूखंड घोटाले हों, चाहे उधमसिंहनगर, नैनीताल या देहरादून के हों, ये समस्त भूमि भूखंडों के विक्रय में भारी अनियमितताएँ और घोटाले हुए हैं. अभी तक किसी भी भू-घोटाले का पूरा सच सामने नहीं आया है. मगर जितना सच सामने आया है, उससे सत्तारूढ़ दल के चेहरे पर कालिख पुती हुई दिखाई देती है. इन्हीं भू-घोटालों के साथ डेमोग्राफिक चेंज का मामला भी जुड़ा हुआ है.
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आगे हरीश रावत ने कहा, इन दोनों अंतर्निहित मामलों में समाचार पत्रों ने कुंतलों कागज़ व स्याही खर्च कर चुके हैं और चैनल भी गला फाड़-फाड़ कर चीख चुके हैं. मुख्यमंत्री जी का भी डेमोग्राफिक चेंज एक पसंदीदा ब्रेकफास्ट आइटम है. क्यों न लगे हाथों यह भूखंड प्रकरण के साथ सारे मामलों की जांच एक न्यायिक आयोग को सौंप दी जाए और उसको इस बात की भी जांच सौंपी जाए कि डेमोग्राफिक चेंज पर इस तरीके की उल्टे-सीधे भूमि की खरीद-फरोख्त का कितना असर पड़ा है. यह तो सिद्ध है कि बिना शीर्ष के जमीनों की इतनी बड़ी खरीद-फरोख्त नहीं हो सकती है और मुझे किसी ने बताया है कि 2 एकड़ से ज्यादा की खरीद-फरोख्त में लगभग 5 हजार मामले इन चार जनपदों से संबंधित हैं और अब उन जनपदों में कुछ लोगों के उत्साह के कारण टिहरी भी सम्मिलित हो रहा है. खरीदा किसने, यह तो मालूम है. खरीदा किसके कार्यकाल में, इस पर अभी धुंध छाई हुई है.
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आगे हरीश रावत ने ये भी कहा कि राज्य बनने के बाद कुछ मुख्यमंत्री गण स्वतः स्वर्ग सिधार गए हैं. अब जो भूतपूर्व मुख्यमंत्री रह गए हैं, वे सब भाजपा में हैं. एक मैं ही विपक्ष में हूं, तो इसलिए जब भी मुख्यमंत्री जी भूमि घोटाले और डेमोग्राफिक चेंज की बात करते हैं, तो मुझे कुछ न कुछ अपना पक्ष रखने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ता है. मैं चाहता हूं कि इस प्रक्रिया का न्यायपूर्ण, अर्थात किसके कार्यकाल में कितने ऐसे भूमि घोटाले व अंधाधुंध भूमि खरीद के मामले हुए हैं और कितना डेमोग्राफिक चेंज हुआ है, इसका ब्यौरा राज्य की जनता के सामने आ जाए. सार्वजनिक जीवन में कोई आवश्यक नहीं है कि सब चीजों की सजा ही मिले. जनता की नजर में व्यक्ति का गिरना भी सजा से बड़ी सजा है. मेरा आग्रह रहेगा, चाहे 2027 से पहले का मुख्यमंत्री जी कर लें या चाहे 2027 के बाद का मुख्यमंत्री करे, मगर इन भूखंडों की एक स्वतंत्र न्यायिक आयोग से जांच और डेमोग्राफिक पर उसके पड़े हुए दुष्प्रभावों का अध्ययन होना चाहिए और वह राज्य की जनता के सम्मुख लाया जाना चाहिए.
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