छत्तीसगढ़ विधानसभा में वर्ष 2026-27 का बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि वह एक भावनात्मक और सांस्कृतिक क्षण का भी साक्षी रहा। जब राज्य के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा जाने से पहले छत्तीसगढ़ की मिट्टी का तिलक अपने मस्तक पर लगाया था। यह तिलक एक औपचारिकता नहीं थी इसे अपनी धरती, अपनी अस्मिता और अपने लोगों के प्रति निष्ठा का उद्घोष भी कहा जा सकता है।

उन्होंने अपने बजट भाषण की शुरुआत इन पंक्तियों से की-
“ना चंदन से ना कुमकुम से,
श्रृंगार करा कर आया हूँ,
मैं अपने छत्तीसगढ़ की माटी का
तिलक लगा कर आया हूँ।”
यह दृश्य न केवल राजनीतिक बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रतीक भी बन गया। भारत में संभवतः यह पहला अवसर था जब किसी वित्त मंत्री ने अपने राज्य की मिट्टी का तिलक लगाकर बजट पेश किया हो। माटी का तिलक गहरी भावनाओं का प्रतिनिधि है क्योंकि भारतीय परंपरा में मिट्टी को “मातृभूमि” माना जाता रहा है। माटी मतलब वह वही धरती है जो अन्न, जल और जीवन देती है। मिट्टी को माथे पर लगाने का मतलब ही होता है कि वह व्यक्ति यह स्वीकार करता है कि उसकी शक्ति, उसका सामर्थ्य,उसका अस्तित्व और उसका कर्तव्य इसी धरती से जुड़ा हुआ है। भगवान श्रीराम का उदाहरण इस संदर्भ में काफ़ी महत्वपूर्ण है। अपने वनवास प्रस्थान पर भगवान श्रीराम ने राजसी वस्त्र और वैभव का तो त्याग किया मगर अपनी मातृभूमि अयोध्या की मिट्टी को साथ रखना नही भूले। अपने कृत्य से प्रभु श्रीराम ने यह संदेश दिया कि मिट्टी का महत्व केवल भौतिक नहीं बल्कि आत्मिक भी है। वनवास के कठिन समय में यही अयोध्या की मिट्टी उन्हें अपने कर्तव्य और मूल से जोड़कर रखती थी। छत्तीसगढ़ की साय सरकार में प्रभु श्री राम की उसी परंपरा को प्रदेश के वित्त मंत्री ने दोहराकर यह संदेश दिया है कि यह बजट विकास की योजनाओं का और धरती से जुड़े संकल्पों का दस्तावेज है।

छत्तीसगढ़ बजट-2026-27, ‘SANKALP’ थीम पर आधारित है। पिछले दो वर्षों में सरकार ने GYAN (गरीब, युवा, अन्नदाता, नारी) और GATI (Good Governance, Accelerating Infrastructure, Technology, Industrial Growth) के सिद्धांतों को अपनाया था। इस साल ‘संकल्प’ के माध्यम से सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि अब नीति से उसके परिणाम तक की यात्रा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। 1.72 लाख करोड़ रुपए के इस बजट में प्रदेश की समृद्धि, राज्य का संतुलित विकास और अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य का सकल घरेलू उत्पाद 7 लाख करोड़ से अधिक पहुंचने का अनुमान है जबकि वित्तीय घाटा FRBM की सीमा के भीतर ही रखा गया है। यह राज्य सरकार की वित्तीय अनुशासन और विकास के बीच संतुलन का संकेत है।
दूरदर्शीतापूर्ण तैयार हुए इस बजट से स्पष्ट है कि विकास अब केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि प्रदेश भर में इसका विस्तार होगा। महानगरों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर को विकसित करने की घोषणा इस बजट की प्रमुख विशेषता बनी। एयरपोर्ट विकास, फ्लाईओवर निर्माण और 115 करोड़ की लागत से बन रहा चार मंजिला कैंसर अस्पताल विकास की एक नई इबारत लिखने वाला है। कैंसर अस्पताल में अत्याधुनिक लीनियर एसीलीरेटर मशीनें, 100 बेड की सुविधा और निःशुल्क दवाइयां यह स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि बनने वाली है।

बस्तर और सरगुजा के अबूझमाड़ और जगरगुंडा जैसे क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी बसाने की ऐतिहासिक योजना इन पिछड़े क्षेत्रों के लिए आशा की एक नई किरण बनेगी। ‘संकल्प’ में यह भी शामिल है कि कभी नक्सलवाद के कारण चर्चित रहे इन क्षेत्रों को अब शिक्षा और विकास के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। बस्तर के इंद्रावती नदी पर बैराज निर्माण, अतिरिक्त पोषण सहायता, बस सेवा और औद्योगिक प्रोत्साहन ये सभी क्षेत्रीय असंतुलन को समाप्त करने वाले गंभीर कदम साबित होंगे।
कृषक उन्नति योजना के लिए 10,000 करोड़ रुपए, महतारी वंदन योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपए और 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर बालिकाओं को 1.5 लाख रुपए देने की रानी दुर्गावती योजनाओं को सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता हैं।
संपत्ति पंजीयन में महिलाओं के नाम 50% की छूट और लखपति दीदी भ्रमण योजना से महिला शक्ति के आर्थिक स्वावलंबन को प्राथमिकता से राज्य की महिलाएँ काफ़ी राहत महसूस कर रही हैं। प्रदेश के युवाओं के लिए मेगा परीक्षा केंद्र, CG ACE योजना, AI मिशन और स्टार्टअप प्रोत्साहन इस बात का संकेत हैं कि छत्तीसगढ़ परंपरा, तकनीक और नवाचार की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने मानव संसाधन विकास पर विशेष ध्यान देते हुए बजट-2026-27 में स्कूल शिक्षा के लिए 22,000 करोड़ से अधिक का प्रावधान रखा है जो राज्य की शैक्षणिक व्यवस्था को मज़बूती प्रदान करेगी। प्रदेश में 200 बिस्तरों का अस्पताल, नए मेडिकल कॉलेज, डायलिसिस केंद्र और आयुष्मान योजना में 1,500 करोड़ रुपयों का प्रावधान रखा गया है। AI मिशन, पर्यटन विकास मिशन, खेल उत्कर्ष मिशन, अधोसंरचना मिशन, स्टार्टअप और NIPUN मिशन में हर मिशन के लिए 100 करोड़ रुपयों के प्रावधान पता चलता है कि सरकार इस दिशा में मिशन मोड में काम करना चाहती है।

बजट-2026-27 की उल्लेखनीय विशेषता यही है कि इसमें परंपरा और आधुनिकता का संतुलन दिखाई दे रहा है।इस बजट में एक तरफ़ माटी का तिलक है तो दूसरी तरफ़ AI मिशन। भगवान श्रीराम की परंपरा और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 इस बजट में साथ-साथ चल रहे हैं। सच्चाई यह है कि विकास केवल कंक्रीट और आंकड़ों का खेल नहीं है बल्कि सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा हुआ संकल्प भी है। राज्य के वित्त मंत्री ने छत्तीसगढ़ की मिट्टी का तिलक लगा कर साबित किया कि बजट सत्ता का नहीं बल्कि सेवा का दस्तावेज है। बजट में 1.72 लाख करोड़ का वित्तीय प्रावधान राज्य के 3 करोड़ लोगों के विश्वास का प्रतीक है।

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ /लल्लूराम डॉट कॉम


