विश्व युद्ध की आशंका इन दिनों चरम पर पहुंच गई है. मार्च 2026 के मध्य में वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य तीन प्रमुख मोर्चों पर उबाल पर है. यूक्रेन में रूस का आक्रमण, मध्य पूर्व में अमेरिका-इजराइल बनाम ईरान का सीधा युद्ध और अब दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती आक्रामकता. पूर्व नाटो कमांडरों और भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ये तीनों संघर्ष एक-दूसरे से जुड़कर दुनिया को थर्ड वर्ल्ड वार की दहलीज पर खड़ा कर रहे हैं.

दक्षिण चीन सागर में हाल की घटनाओं ने जापान, वियतनाम, दक्षिण कोरिया और फिलीपींस जैसे देशों में चिंता बढ़ा दी है. दक्षिण चीन सागर में चीन की हजारों मछली पकड़ने वाली नौकाओं की असामान्य गतिविधियां देखी जा रही है.

यूक्रेन में रूस का आक्रमण, अमेरिका-इजराइल बनाम ईरान युद्ध और अब दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता से विश्व युद्ध की आशंका बढ़ी है. इससे जापान, वियतनाम और दक्षिण कोरिया चिंतित हैं. अमेरिका दो मोर्चे पर उलझता हुआ दिख रहा है. उसके नाटो के सहयोगियों में ईरान जंग को मतभेद उभरा है. ऐसे में रूस और चीन इस स्थिति को अवसर के रूप में देख रहे हैं. ऐसे में मन में ये बात आती है कि क्या वर्ल्ड वार तीन शुरू होने के कगार पर है!

28 फरवरी को शुरू हुआ मिडिल ईस्ट युद्ध अब विश्व ऊर्जा संकट का प्रमुख कारण बन चुका है. अमेरिकी हमलों ने ईरान के खर्ग द्वीप को निशाना बनाया है. यह ईरान का प्रमुख तेल निर्यात केंद्र है. खर्ग के बंदरगाह से ही ईरान करीब 90 फीसदी तेल का निर्यात करता है. मौजूदा वक्त में चीन ईरान से तेल का सबसे बड़ा खरीदार है. ऐसे हमले साबित करता है कि सीधे तौर पर चीन के हितों पर हमला हो रहा है.

ईरान ने भी इजराइल पर मिसाइलों की झड़ी लगा दी है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी बंद कर दिया. इस बंदी से वैश्विक तेल आपूर्ति में भारी कमी आई है, जिससे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इतिहास की सबसे बड़ी आपातकालीन तेल रिलीज की घोषणा की, लेकिन संकट गहराता जा रहा है.

ईरान के नए सर्वोच्च नेता ने स्पष्ट कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट बंद रहेगा, जिससे यूरोप और एशिया में ऊर्जा संकट और गहरा गया है.

पुर्बी यूरोप में रूस-यूक्रेन का युद्ध भी अब 5वें साल में जारी है. रूस ने मिसाइल अभियानों को तेज किया है. यूक्रेन को नाटो से सहायता मिल रही है, लेकिन अमेरिकी हथियारों की कमी के कारण खालीपन पैदा हुआ है. यही नहीं ईरान संकट में तेल के भाव बढ़ने से रूस भी जमकर कमाई कर रहा है. यानी बीते 15 दिनों में रूस की आर्थिक ताकत बढ़ी है जिसका उदाहरण है यूक्रेन को लेकर अमेरिकी समर्थन में कमी आना.

अब सबसे बड़े खतरे की बात करते है जो दक्षिण चीन सागर से जुड़ा है, जिसे तीसरा मोर्चा कहा जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक 13 मार्च को हजारों चीनी नौकाओं की पूर्वी चीन सागर में असामान्य गतिविधियां देखी गई, जो सैन्य उद्देश्यों क लिए इस्तेमाल हो सकती हैं. जैसे ब्लॉकेड, क्षेत्र नियंत्रण या संकट में सैन्य सहायता. चीन ने अमेरिका-फिलीपींस-ऑस्ट्रेलिया के संयुक्त अभ्यासों के जवाब में कॉम्बैट रेडीनेस पेट्रोल बढ़ाए हैं.

इन सबके परिणामस्वरूप सबसे ज्यादा जिसकी चिंता बढ़ी है, वो है- जापान, वियतनाम और दक्षिण कोरिया. जापान पूर्वी चीन सागर में सेनकाकू/डियाओयू द्वीपों पर चीन से टकराव का सामना कर रहा है. वियतनाम दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता से प्रभावित है, जबकि दक्षिण कोरिया क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंतित है. विश्लेषकों के अनुसार इस वक्त दुनिया को वर्ल्ड वार की दहलीज पर पहुंचाने वाले तीन प्रमुख कारण हैं- पहला, अमेरिका-चीन का सीधा टकराव, दूसरा- नाटो का रूस के साथ युद्ध में शामिल होना, ईरान और स्ट्रेट ऑफर होर्मुज का बंद होना.

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