मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध की वजह से एशियाई देशों को गैस और तेल की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है. इस दौरान भारत में भी LPG की क्राइसिस देखने को मिल रही है. हालांकि, इस बीच राहत पहुंचाने वाली खबर सामने आई है. पाइक्सिस पायनियर नाम का एक जहाज एलपीजी गैस लेकर रविवार (22 मार्च) को भारत आ गया है. मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक न्यू मंगलुरु बंदरगाह पर अगले हफ्ते बड़ी मात्रा में एलपीजी यानी गैस पहुंचने वाली है. जानकारी के अनुसार, कुल मिलाकर करीब 72,700 टन एलपीजी आ सकती है और इसकी शुरुआत हो चुकी है. 

देश में जारी गैस की किल्लत के बीच कर्नाटक के न्यू मंगलुरु पोर्ट पर अगले हफ्ते तक 72,700 टन LPG पहुंचनी है. इस सिलसिले की शुरुआत हो चुकी है. एक जहाज रविवार को पहुंच गया है.

सबसे पहले रविवार को एक टैंकर आया है, जिसमें 16,714 टन एलपीजी गैल लदी है. यह टैंकर पाइक्सिस पायनियर है, जिसमें सिंगापुर का झंडा लगा हुआ है. इसका कुल वजन 47,236 टन है. यह जहाज पोर्ट ऑफ नेडरलैंड से 14 फरवरी को चला था और यहां एजिस लॉजिस्टिक्स लिमिटेड के लिए एलपीजी उतारेगा. इसके बाद यह जहाज सोमवार सुबह वापस रवाना हो जाएगा.

पहले एक और टैंकर शिवालिक को 18 मार्च को 26,000 टन एलपीजी लेकर मंगलुरु आना था, लेकिन उसने अपना माल वाडिनार पोर्ट पर ही अपोलो ओसिएन जहाज को दे दिया. इसके बाद 25 मार्च को अपोलो ओसिएन नाम का टैंकर भी पोर्ट पर आएगा. यह 26,687 टन एलपीजी लेकर आएगा. इस गैस को इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के लिए उतारा जाएगा. यह जहाज वियतनाम का झंडा लिए हुए है और गुजरात के वाडिनार बंदरगाह से आएगा.

हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के लिए 29 मार्च को एक और टैंकर अमेरिका से करीब 30,000 टन एलपीजी लेकर यहां पहुंचेगा. मंगलुरु में HPCL का एलपीजी प्लांट इस गैस को स्थानीय बॉटलिंग प्लांट्स तक पहुंचाता है और पाइपलाइन के जरिए बेंगलुरु समेत अन्य जगहों तक सप्लाई करता है. इस तरह आने वाले दिनों में न्यू मंगलुरु पोर्ट पर एलपीजी की बड़ी खेप पहुंचने से गैस सप्लाई मजबूत होने की उम्मीद है.

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