प्रमोद कुमार, कैमूर। देश के प्राचीनतम मंदिरों में से एक मां मुंडेश्वरी का मंदिर है, जहां बकरे की रक्त विहीन बलि देने की प्रथा है। यह मंदिर बिहार राज्य के कैमूर जिले के भगवानपुर प्रखण्ड के पावरा पहाड़ी पर स्थित है, जो अष्टकोणीय मंदिर है।मंदिर के परागण में मां मुंडेश्वरी बिराजमान है और शिव के रूप में महामंडलेश्वर हैं, जो दिन में चार बार रंग बदलते हैं।

कई राज्यों से दर्शन को आते हैं श्रद्धालु

मां मुंडेश्वरी का दर्शन के लिए देश के कई राज्यों से श्रद्धालु याहं आते हैं। विदेशी श्रद्धालु भी माता के अनोखी प्रथा को देखने आते है। यहां पर चावल और फूल के अछत से बकरे की बलि दी जाती है। ऐसे तो सालों भर श्रद्धालु माता के दर्शन करने आते रहते हैं। पर चैत नवमी और शारदीय नवरात्र में यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं।

भक्तों की पूरी होती है मनोकामना

उत्तर प्रदेश के चंदौली से पूरे परिवार के साथ दर्शन करने आए एक श्रद्धालु ने बताया कि मां मुंडेश्वरी का अद्भुत लीला है, जहां चावल और फूल के अछत से बकरे की बलि दी जाती है। हम हर साल नवरात्र में माता का दर्शन करने आते हैं। वहीं, एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि, मेरे बेटे को जन्म के ठीक बाद जॉन्डिस हो गया था। तब हमने माता मुंडेश्वरी से मन्नत मांगा था कि हे माता मेरा बेटा ठीक हो जाएगा तो बकरा चढ़ाएंगे। इसलिए बकरे को लेकर आए हैं।

बलि के बाद बकरे को कर दिया जाता है मुक्त

बता दें कि मां मुंडेश्वरी मंदिर में श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद माता को बकरे की बलि चढ़ाते हैं। लेकिन यहां पर अन्य मंदिरों या देवी स्थानों की तरह बकरे की बलि देने की परंपरा नहीं है। मुंडेश्वरी मंदिर में सात्विक बलि देने की परंपरा है। दरअसल मंदिर के पुजारी बलि के लिए लाए गए बकरे को माता की प्रतिमा से स्पर्श कराते हैं और बकरे पर कुछ चावल के अक्षत फेंकते हैं। इसके तुरंत बाद बकरा अचेत, मृतप्राय सा हो जाता है। कुछ समय बाद पुजारी दोबारा अक्षत के चावल फेंकते हैं, जिसके बाद, बकरा उठ जाता है और उसे मुक्त कर दिया जाता है।

नवरात्र में पहुंचते हैं लाखों भक्त

मां मुंडेश्वरी मंदिर के पुजारी राधेश्याम बताते हैं कि यह मंदिर देश के प्राचीनतम मंदिरों में से एक है, जो पावरा पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर अष्टकोणीय मंदिर है। मंदिर के प्रांगण में महा महामंडलेश्वर शिव बिराजमान है। दिन में तीन से चार बार रंग बदलते हैं। उन्होंने बताया कि, यहां अनोखी प्रथा है, जहां बकरे की अहिंसक बलि दिया जाता है। शारदीय नवरात्र हो चैत नवरात्र माता के दरबार में लाखों भक्तों की भीड़ जुटी रहती है।

थाईलैंड का फूल, पश्चिम बंगाल के कारीगर

मां मुंडेश्वरी मंदिर के न्यास मंदिर परिषद के लेखपाल गोपाल कृष्ण का कहना है कि माता के अनूठी प्रथा है जो बकरे की अहिंसक बलि दिया जाता है। सुरक्षा को लेकर 21 पॉइंट बने हैं, जहां मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती रहती है। माता के मंदिर को सजाने के लिए थाईलैंड से फूल मंगाई गई है। वहीं, पश्चिम बंगाल से कारीगर लगे हुए हैं। नवमी के दिन माता का मंदिर 24 घंटे खुली रहती है।

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