केंद्र सरकार द्वारा सिंगल-यूज प्लास्टिक (SUP) पर लगाए गए देशव्यापी प्रतिबंध के बावजूद भारत के बड़े शहरों में इन प्रतिबंधित प्लास्टिक उत्पादों का उपयोग जारी है। खासतौर पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली इस मामले में सबसे चिंताजनक स्थिति में है। पर्यावरण समूह टॉक्सिक्स लिंक द्वारा बुधवार को जारी ‘रिविजिटिंग सिंगल यूज प्लास्टिक बैन’ नामक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि देशव्यापी बैन का पालन करने के मामले में दिल्ली सहित कई प्रमुख शहरों का प्रदर्शन काफी खराब है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दिल्ली में सिंगल-यूज प्लास्टिक उत्पादों का व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है, चाहे वह दुकानों में पैकेजिंग हो, स्ट्रीट फूड पर इस्तेमाल होने वाली प्लेट्स और ग्लास हों, या अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं। इस स्थिति ने राजधानी की पर्यावरणीय चुनौती को और बढ़ा दिया है।

पर्यावरण समूह टॉक्सिक्स लिंक की ‘रिविजिटिंग सिंगल यूज प्लास्टिक बैन’ रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि देशव्यापी बैन का पालन करने के मामले में दिल्ली सहित कई प्रमुख शहर सबसे खराब प्रदर्शन कर रहे हैं। रिपोर्ट में शामिल सर्वेक्षण क्षेत्र में सड़क किनारे ठेले, बाजार, छोटे रेस्टोरेंट, किराने की दुकानें, धार्मिक स्थल, रेलवे प्लेटफॉर्म और संगठित रिटेल आउटलेट शामिल हैं। इसके अनुसार, पतले प्लास्टिक कैरी बैग, डिस्पोजेबल कटलरी, प्लास्टिक के कप, प्लेट और स्ट्रॉ अभी भी बड़े पैमाने पर उपयोग किए जा रहे हैं। यह विशेष रूप से अस्थायी और छोटे पैमाने के व्यावसायिक स्थानों में देखा गया।

सर्वेक्षण के नतीजे

सर्वेक्षण के नतीजेरिपोर्ट में सड़क किनारे ठेले, छोटे रेस्टोरेंट, किराने की दुकानें, धार्मिक स्थल, रेलवे प्लेटफॉर्म, स्थानीय बाजार, आइसक्रीम पार्लर और साप्ताहिक बाजारों जैसी स्थानीय और अनौपचारिक व्यावसायिक जगहों का सर्वेक्षण किया गया। इसके नतीजे चिंताजनक रहे पतले प्लास्टिक कैरी बैग, डिस्पोजेबल कटलरी, प्लास्टिक के कप, प्लेट और स्ट्रॉ इन जगहों पर पूरी तरह या लगभग पूरी तरह से मौजूद पाए गए। इसके विपरीत, मॉल और संगठित रिटेल आउटलेट्स में बैन का पालन काफी बेहतर तरीके से देखा गया।

देश के 4 शहरों में चार महीनों के दौरान किया सर्वे

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से अगस्त 2025 के बीच दिल्ली, मुंबई, गुवाहाटी और भुवनेश्वर में कुल 560 स्थानों का सर्वे किया गया। इसमें पाया गया कि दिल्ली: 86% स्थानों पर प्रतिबंधित प्लास्टिक पाया गया, और यह मामले में दूसरे नंबर पर रही। भुवनेश्वर: 89% स्थानों पर उल्लंघन पाया गया, जिससे यह सबसे ज्यादा उल्लंघन वाला शहर बन गया। मुंबई: 85% जगहों पर प्रतिबंधित प्लास्टिक देखा गया। गुवाहाटी: 76% स्थानों पर बैन की गई प्लास्टिक वस्तुएं मौजूद थीं। स्थानीय और अनौपचारिक विक्रेता जैसे सड़क किनारे ठेले, सब्जी वाले, आइसक्रीम पार्लर और साप्ताहिक बाजारों में बैन की गई प्लास्टिक चीजें पूरी तरह या लगभग पूरी तरह से मौजूद पाई गईं। इसके विपरीत, मॉल और संगठित रिटेल आउटलेट्स में बैन का पालन बेहतर तरीके से देखा गया।

बैन को सार्थक बनाने के लिए करना होगा यह काम

सिंगल-यूज प्लास्टिक बैन के क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हुए Ravi Agarwal, डायरेक्टर Toxics Link ने कहा, “अधिकतर जगहों पर बैन की गई प्लास्टिक चीजों की लगातार मौजूदगी यह बताती है कि बैन को लागू करने का तरीका अभी भी एक जैसा नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “जब तक बैन को लागू करने के तरीके में सुधार नहीं होता और इन चीजों की सप्लाई को कंट्रोल नहीं किया जाता, तब तक यह बैन प्लास्टिक से होने वाले कचरे और प्रदूषण की समस्या को प्रभावी ढंग से हल नहीं कर पाएगा।” रिपोर्ट के मुताबिक, सिंगल-यूज प्लास्टिक बैन के प्रभावी क्रियान्वयन में उपभोक्ता व्यवहार और लागत सबसे बड़ी चुनौतियां बनकर सामने आई हैं। 91% छोटे विक्रेताओं ने बताया कि ग्राहक अब भी प्लास्टिक कैरी बैग की मांग करते हैं।  91% विक्रेताओं ने कहा कि प्लास्टिक के विकल्प अपनाने में ज्यादा लागत आती है, जो बैन का पालन करने में बड़ी बाधा है।

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