दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने दुष्कर्म के एक मामले में 57 वर्षीय आरोपी को जमानत दे दी है। अदालत ने एफआईआर दर्ज कराने में करीब ढाई साल की देरी और पीड़िता के बयानों में विरोधाभास को इस फैसले का मुख्य आधार माना। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस Prateek Jalan ने मंगलवार को आरोपी खेम कुमार को राहत देते हुए 40 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी को कुछ अतिरिक्त शर्तों का पालन करना होगा, ताकि वह ट्रायल की प्रक्रिया को प्रभावित न कर सके।
पीड़िता, जिसकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है, ने आरोप लगाया कि 1990 के दशक में उसका सहपाठी रहा आरोपी मई 2023 में शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। महिला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की थी और बाद में विदेश में भी शिक्षा प्राप्त की। पीड़िता के अनुसार, आरोपी ने उसके रहने की व्यवस्था की थी और वहीं इस वारदात को अंजाम दिया। इस संबंध में दिसंबर 2025 में रनहोला थाना में मामला दर्ज किया गया।
3 साल पहले किया था रहने का इंतजाम
पीड़िता ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में जब वह अपने माता-पिता से अलग हो गई थी, तब आरोपी ने उसके रहने की व्यवस्था कराई। महिला का कहना है कि जिस स्थान पर आरोपी ने उसे ठहराया, वहीं उसने उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। FIR दर्ज करने में हुई देरी को लेकर सरकारी वकील ने अदालत में दलील दी कि पीड़िता को यह गलतफहमी थी कि आरोपी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) का अधिकारी है और तलाकशुदा है। इस पर अदालत ने कहा कि इस पहलू की विस्तृत जांच मुकदमे के दौरान की जाएगी।
मामले में सुनवाई के बाद 24 मार्च को अदालत ने आरोपी को जमानत दे दी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कथित तौर पर यौन संबंध बनने की पहली घटना और मौजूदा एफआईआर दर्ज होने के बीच ढाई साल से अधिक का अंतर है। साथ ही, अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता और पीड़िता दोनों ही समझदार और पढ़े-लिखे व्यक्ति हैं। इसके अलावा, कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता ने 14 मई 2023 को द्वारका सेक्टर-9 थाना के एसएचओ को एक शिकायत दी थी, जिसमें दुष्कर्म का कोई उल्लेख नहीं था। अदालत के अनुसार, वर्तमान एफआईआर में लगाए गए आरोप उस पहले दी गई शिकायत से भिन्न प्रतीत होते हैं।
उच्च न्यायालय ने यह भी पाया कि मौजूदा एफआईआर में शिकायतकर्ता ने एक महत्वपूर्ण तथ्य का उल्लेख नहीं किया। अदालत के अनुसार, इस एफआईआर से ठीक एक दिन पहले पीड़िता ने नॉर्थ एवेन्यू थाना में एक अन्य शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उसने कहा था कि उसने आरोपी के खिलाफ पहले कोई शिकायत नहीं की है। हालांकि, रिकॉर्ड से यह सामने आया कि पीड़िता इससे पहले द्वारका सेक्टर-9 थाना में भी शिकायत दे चुकी थी। ऐसे में अदालत ने इस विरोधाभास को नोट किया और इसे मामले की सुनवाई के दौरान जांच का विषय बताया।
शादी का झूठा वादा करने का आरोप
आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ता विक्रम पवार ने अदालत में दलील दी कि उनका मुवक्किल पहले से शादीशुदा है। उन्होंने कहा कि 26 दिसंबर 2025 को दर्ज एफआईआर शादी का झूठा वादा कर यौन संबंध बनाने के आरोपों पर आधारित है, जिसमें पहली घटना 11 मई 2023 की बताई गई है। वकील ने आगे तर्क दिया कि एफआईआर में लगाए गए आरोप 14 मई 2023 को द्वारका सेक्टर-9 थाना के एसएचओ को दिए गए शिकायतकर्ता के बयान और एफआईआर दर्ज होने से एक दिन पहले नॉर्थ एवेन्यू थाना में की गई शिकायत से मेल नहीं खाते। उन्होंने यह भी बताया कि नॉर्थ एवेन्यू थाने में दी गई शिकायत में पीड़िता ने कहा था कि उसने आरोपी के खिलाफ पहले कोई शिकायत नहीं की थी, जबकि इससे पहले वह द्वारका में शिकायत दे चुकी थी।
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