रोहतास/अविनाश श्रीवास्तव। गर्मी की दस्तक के साथ ही रोहतास जिले में सोन नदी के तटीय इलाकों में हाहाकार मच गया है। नदी के किनारे बसे सैकड़ों गांवों में भू-गर्भ जलस्तर तेजी से नीचे गिरने के कारण पेयजल की भीषण समस्या उत्पन्न हो गई है। डेहरी, डालमियानगर, न्यू सिधौली और नासरीगंज जैसे क्षेत्रों में ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
अवैध खनन ने छीना ग्रामीणों का हक
ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि सोन नदी में बेखौफ जारी अवैध बालू खनन इस त्रासदी का मुख्य कारण है। खनन माफियाओं की सक्रियता ने जल संरचना को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। परिणामस्वरूप, गर्मी शुरू होते ही चापाकल, कुएं और मोटर पंप जवाब दे चुके हैं। समस्या सिर्फ पीने के पानी तक सीमित नहीं है; तटवर्ती इलाकों में बड़े पैमाने पर होने वाली सब्जियों की खेती भी सिंचाई के अभाव में दम तोड़ रही है। बोरिंग के सूखने से किसानों की जीविका पर सीधा प्रहार हुआ है।
धारा मोड़कर प्रकृति से खिलवाड़
जांच में यह बात सामने आई है कि बालू माफियाओं ने अवैध उत्खनन की सुविधा के लिए नदी के बीचों-बीच बांध बनाकर उसकी प्राकृतिक धारा को ही परिवर्तित कर दिया है। जो मुख्य धारा पहले स्वतंत्र रूप से बहती थी, उसे कृत्रिम अवरोधों से दूसरे छोर पर मोड़ दिया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, जिन इलाकों में पहले महज 30-40 फीट पर पानी मिल जाता था, वहां अब 80 फीट की खुदाई के बाद भी नमी नसीब नहीं हो रही है।
नल-जल योजना की खुली पोल
संकट के इस दौर में सरकारी नल-जल योजना भी सफेद हाथी साबित हो रही है। ग्रामीणों ने योजना को पूरी तरह विफल बताते हुए कहा कि पानी की आपूर्ति न तो नियमित है और न ही पर्याप्त। कई दिनों तक सप्लाई ठप्प रहने से दैनिक मजदूरी करने वालों को भारी मुसीबत झेलनी पड़ती है। आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और खनन विभाग से गुहार लगाई है कि नदी के बीच बने अवैध बांधों को तत्काल ध्वस्त किया जाए ताकि नदी अपनी मूल धारा में लौट सके और जलस्तर में सुधार हो।
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