संदीप शर्मा, विदिशा। एमपी के विदिशा जिले के सरकारी स्कूलों के लिए एक सराहनीय और अभिनव पहल की शुरुआत हुई है। अब तक बेकार पड़ी स्कूलों की कृषि भूमि को हरित क्रांति योजना के तहत आबाद किया जाएगा। दरअसल, जिला प्रशासन ने जिले के 184 शासकीय स्कूलों की 260.35 हेक्टेयर भूमि को एक वर्ष के लिए नीलामी पर देने का निर्णय लिया है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य संसाधनों का सदुपयोग कर स्कूलों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। नीलामी से मिलने वाली राशि सीधे संबंधित स्कूलों के खातों में जमा की जाएगी, जिससे स्कूल अपने विकास कार्यों, मरम्मत और शैक्षणिक सुविधाओं को बेहतर बना सकेंगे।

खुली बोली लगेगी

नीलामी के लिए 35,000 रुपए प्रति हेक्टेयर का न्यूनतम आधार मूल्य निर्धारित किया गया है। यह प्रक्रिया 24 अप्रैल 2026 को संबंधित तहसीलदारों के न्यायालय में पूरी होगी। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए तहसीलदार, शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और शाला प्रभारी की मौजूदगी में खुली बोली आयोजित की जाएगी।

अमानत राशि जमकर ले सकेंगे भाग

इस योजना के तहत लटेरी तहसील के सर्वाधिक 45 और विदिशा तहसील के 33 स्कूलों को शामिल किया गया है। इच्छुक बोलीदाता 10 प्रतिशत अमानत राशि जमा कर इस प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं। कलेक्टर के निर्देशन में शुरू की गई यह पहल न केवल खाली भूमि का सदुपयोग सुनिश्चित करेगी, बल्कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को गति प्रदान कर शिक्षा के स्तर को उन्नत करने में भी सहायक सिद्ध होगी।

डीपीसी आर पी लखेरा ने बताया कि कलेक्टर के निर्देशानुसार 184 शालाओं के पास भूमि है, जो हरित क्रांति योजना के तहत आवंटित की गई है। इन सभी भूमि को एक साल के लिए नीलाम करेंगे। इस काम की जिम्मेदारी तहसीलदारों को दी गई है। जल्द ही नीमाली की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

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