राजकुमार पाण्डेय की कलम से
मैडम को सचिव पद का रौब
सरकारी गाड़ी और ड्राइवर के साथ बच्चे को स्कूल छोड़ने-लेने आने वाली मैडम न कोई अफसर हैं न किसी अन्य बड़े औहदे पर. होने को तो गृहणि हैं, लेकिन रौब सचिव स्तर का है. मैडम का यह एटीट्यूड स्कूल के साथ आते-जाते रास्ते में भी देखने को मिल जाता है. जरूरत पड़ने पर मैडम फर्राटेदार अंग्रेजी में ऐसे पेश आती हैं जैसे सचिव के केबिन में अदने से कर्मचारी से बात कर रही हों. मैडम का यह बर्वाव स्कूल और अन्य पेरेंटस के बीच चर्चा का विषय बन गया है. पेरेंटस अक्सर स्कूल के आसपास यह चर्चा करते हुए नजर आते हैं कि भला हो पति ही आईएएस है. खुद सचिव होतीं तो पति से भी हमारे जैसा ही बर्ताव करतीं.
विधायकजी को मंत्री दर्जा नहीं मिलने का मलाल
नेताजी जब मंत्री थे तो क्षेत्र ही नहीं आधे प्रदेश में हुनर की तूती बोलती थी. मंत्रीजी का मानना था कि ऐसा कोई काम ही नहीं जहां उनका फॉर्मूला फिट न बैठ पाए. समय के साथ नेताजी मंत्रीजी से विधायक हो गए. तमाम जतन के बाद भी मंत्री नहीं बन पाने का मलाल तो उन्हें लंबे समय से था ही, लेकिन इतना भरोसा जरूर था कि अपने फॉर्मूले से मंत्री नहीं तो मंत्री दर्जा तो ले ही आएंगे. जब सरकार में राजनैतिक नियुक्तियों की बारी आई तो विधायकजी ने अपने सारे फॉर्मूले एक साथ लगा दिए, बावजूद इसके दाल नहीं गली तो मंत्री दर्जा नहीं मिल सका. समर्थकों के बीच विधायकजी अब अपने पुराने दिनों की पॉवर को बार-बार याद कर रहे हैं. संगठन और सरकार में सुनवाई नहीं होने से विधायकजी को अब यह भी डर सताने लगा है कि कहीं लंबा जुर्माना जमा करना न पड़ जाए.
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दिग्विजय सिंह-जीतू की जंग, कई के चेहरों पर खिली उमंग
कहा ही जा रहा था कि कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. बैठक के बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के बीच गुरु-चेला का वाक्या हुआ तो कांग्रेस की खींचतान जगजाहिर हो गई. भरी बैठक में सार्वजनिक रूप से हुए घटनाक्रम को लेकर पार्टी के कई नेता मायूस रहे, लेकिन कुछ नेताओं को यह रार बेहद पसंद आई. ये नेता यह जानकार मन ही मन प्रफुल्लित होते रहे कि दोनों की खींचतान में भला तो अपना ही होना है. एक नेताजी अपने बंगले पर समर्थकों के साथ इस विषय के मेरिटस-डीमेरिटस पर मंथन करते देखे गए.
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आंच इंजीनियरिंग इन चीफ तक
चन्हित ठेकेदारों को टेंडर दिलवाने की प्रक्रिया में एक विभाग ने कुछ अफसरों पर कार्रवाई कर दी है. कारण बताया गया है विभाग में शुद्धिकरण हो. लेकिन कार्रवाई होने के बाद अब आरोपी अफसर ही विभाग के मुखिया के खिलाफ मोर्चा खोलते दिख रहे हैं. ये अफसर समयानुसार उचित फोरम पर जाकर अपनी उपस्थिति भी दर्ज करवा रहे हैं और इस दौरान एक ही बात पर चर्चा होती है कि सबूतों के आधार पर तो असली आंच विभाग के इंजीनियरिंग इन चीफ तक आना ही चाहिए. हालांकि फिलहाल सबसे बड़े इंजीनियरिंग साहब पर किसी तरह की कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही. आपको बता दें यह विभाग गड्ढों को लेकर पिछले साल सबसे अधिक चर्चा में रहा था.
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