पंचकूला के सरकारी कॉलेज में छात्रों के बीच बेंच पर बैठे महीपाल ढांडा, सुनी समस्याएं; नो एंट्री नोटिस हटाने के दिए निर्देश

कृष्ण कुमार सैनी, पंचकूला। समाज में सरकारी नौकरी को लेकर जिस तरह का भरोसा दिखाई देता है, क्या वैसा ही भरोसा सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की शिक्षा व्यवस्था पर भी है? हरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल सिंह ढांडा ने पंचकूला के सेक्टर-1 स्थित सरकारी कॉलेज में विद्यार्थियों से संवाद के दौरान इसी सवाल को सामने रखा।

उन्होंने कहा कि बच्चे और अभिभावक सरकारी नौकरी को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन शिक्षा के मामले में निजी स्कूलों और कॉलेजों को बेहतर मानने की सोच अभी भी दिखाई देती है। सरकार का प्रयास है कि सरकारी शिक्षण संस्थानों का शैक्षणिक स्तर और सुविधाएं इतनी बेहतर हों कि विद्यार्थी यहां पढ़ाई करने में गर्व और भरोसा महसूस करें।

प्रोटोकॉल छोड़ छात्रों के बीच पहुंचे मंत्री

औचक निरीक्षण के दौरान शिक्षा मंत्री का अंदाज सामान्य सरकारी निरीक्षणों से अलग नजर आया। कॉलेज पहुंचने के बाद वह सीधे विद्यार्थियों के बीच गए और बेंच पर बैठकर उनसे लंबी बातचीत की।

उन्होंने छात्रों से पढ़ाई, कॉलेज की सुविधाओं, एडमिशन प्रक्रिया और रोजमर्रा की समस्याओं के बारे में जानकारी ली। साथ ही पूछा कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए क्या बदलाव किए जाने चाहिए।

मंत्री के साथ छात्रों का संवाद काफी सहज रहा। विद्यार्थियों ने खुलकर अपनी बात रखी और बातचीत के दौरान हंसी-मजाक का माहौल भी बना रहा।

‘नो एंट्री’ के नोटिस पर भड़के मंत्री

निरीक्षण के दौरान कॉलेज के चुनावी स्ट्रॉन्ग रूम और एडमिशन ब्लॉक पर लगे ‘NO ENTRY WITHOUT PERMISSION’ के नोटिस ने भी मंत्री का ध्यान खींचा। उन्होंने इस पर आपत्ति जताते हुए ऐसे नोटिस तत्काल हटाने के निर्देश दिए।

मंत्री ने कहा कि कॉलेज विद्यार्थियों और आमजन से जुड़ा शिक्षण संस्थान है। यहां ऐसा माहौल नहीं होना चाहिए जिससे विद्यार्थियों को अपनी समस्या लेकर अधिकारियों तक पहुंचने में झिझक या परेशानी हो।

उन्होंने कॉलेज प्रशासन को निर्देश दिए कि विद्यार्थियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और उन्हें समाधान के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

शिक्षक सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित न रहें

महीपाल सिंह ढांडा ने प्राध्यापकों और अधिकारियों से विद्यार्थियों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने को कहा। उन्होंने कहा कि शिक्षक की भूमिका सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, करियर और भविष्य की दिशा तय करने में भी शिक्षकों की अहम भूमिका है।

डिग्री नहीं, रोजगार की तैयारी पर जोर

शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य युवाओं को केवल डिग्री दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगारपरक शिक्षा, कौशल और नई तकनीक से लैस करना है। विद्यार्थियों को बदलते रोजगार अवसरों के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा।

उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की व्यवस्था में लगातार सुधार किए जा रहे हैं और इसका असर दाखिलों तथा परीक्षा परिणामों में भी दिखाई दे रहा है। सरकार चाहती है कि सरकारी शिक्षण संस्थान ऐसे मजबूत विकल्प बनें, जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए विद्यार्थी निजी संस्थानों की बजाय सरकारी संस्थानों को प्राथमिकता दें।

औचक निरीक्षणों के जरिए जमीनी हकीकत पर नजर

शिक्षा मंत्री के लगातार औचक निरीक्षणों को सरकारी शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की इसी कवायद से जोड़कर देखा जा रहा है। इन दौरों में अधिकारियों की रिपोर्ट पर निर्भर रहने के बजाय विद्यार्थियों और शिक्षकों से सीधे बातचीत कर जमीनी समस्याओं को समझने पर जोर दिया जा रहा है।

पंचकूला कॉलेज में छात्रों के बीच बैठकर उनकी बात सुनने से लेकर ‘नो एंट्री’ के नोटिस हटाने के निर्देश तक, मंत्री ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकारी शिक्षण संस्थानों में सुधार केवल इमारत और सुविधाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए। सबसे जरूरी है कि विद्यार्थी सरकारी संस्थानों को लेकर भरोसा महसूस करें।

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