चंडीगढ़: बहुचर्चित पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले में बदलाव करते हुए राम रहीम को इस मामले में बरी कर दिया है। हालांकि कोर्ट ने इस केस में दोषी ठहराए गए तीन अन्य आरोपियों—कुलदीप, निर्मल और किशन लाल—की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है।
हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े सबूतों और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि राम रहीम के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी किया जाता है। वहीं अन्य तीन आरोपियों के खिलाफ मौजूद सबूतों को पर्याप्त मानते हुए उनकी उम्रकैद की सजा को यथावत रखा गया।
यह मामला पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या से जुड़ा है, जिसने उस समय देशभर में काफी सुर्खियां बटोरी थीं। छत्रपति ने अपने अखबार में डेरा से जुड़े कई गंभीर आरोपों पर खबरें प्रकाशित की थीं। अक्टूबर 2002 में सिरसा में उनके घर के बाहर उन्हें गोली मार दी गई थी। गंभीर रूप से घायल छत्रपति की 21 नवंबर 2002 को मौत हो गई थी।

इस मामले में 2019 में सीबीआई की विशेष अदालत ने राम रहीम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अब हाईकोर्ट ने उस फैसले को पलटते हुए उन्हें बरी कर दिया है।
हालांकि राम रहीम फिलहाल दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सजा काट रहे हैं और सुनारिया जेल, रोहतक में बंद हैं।
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