पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के 17वें दिन सदन की कार्यवाही काफी गहमागहमी भरी रही। विपक्ष जहां कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है, वहीं सत्ता पक्ष अपनी नीतियों और जवाबदेही पर अडिग नजर आ रहा है।
गांधी सेतु विस्थापितों का दर्द
सदन की शुरुआत में पटना साहिब के विधायक रत्नेश कुमार ने एक गंभीर मानवीय मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि 1971-72 में महात्मा गांधी सेतु के निर्माण के दौरान कई लोग विस्थापित हुए थे। दुखद यह है कि पांच दशक बीत जाने के बाद भी 128 विस्थापित परिवारों को अब तक बसाया नहीं जा सका है। सरकार से इस पर तत्काल जवाब और ठोस कार्रवाई की मांग की गई है।
शराबबंदी पर NDA का रुख स्पष्ट
जेडीयू नेता श्याम रजक ने विपक्ष के हमलों के बीच साफ कर दिया कि बिहार में शराबबंदी कानून सख्ती से जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि एनडीए गठबंधन में इस मुद्दे पर कोई मतभेद नहीं है और यह सामाजिक सुधार की दिशा में सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति का हिस्सा है।
चौकीदार-दफादार मुद्दे पर सीएम और विपक्ष में तीखी नोकझोंक
सत्र के दौरान बीते दिनों चौकीदारों पर हुए लाठीचार्ज का मामला छाया रहा। राजद विधायक भाई वीरेंद्र और कुमार सर्वजीत ने सरकार को बर्बर बताते हुए घेरा। इस पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कड़ा रुख अपनाते हुए विपक्ष को उनकी पिछली सरकारों के कामकाज की याद दिलाई। हालांकि, अपनी बात रखते समय सीएम की जुबान फिसल गई और उन्होंने अपनी सीटों की संख्या 202 के बजाय 2002 कह दी।
संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने स्थिति संभालते हुए आश्वासन दिया कि सरकार लोकतांत्रिक प्रदर्शनों के खिलाफ नहीं है और चौकीदारों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा रहा है। आज सदन में कुल 185 सवालों पर चर्चा होनी है, जिनमें से 180 तारांकित प्रश्न हैं।
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