मुकेश मिश्रा, अशोकनगर। मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले की मुंगावली तहसील में स्थित करीला धाम आस्था और परंपरा का एक अनोखा केंद्र है। यहां स्थित जानकी मंदिर करीला धाम की विशेषता यह है कि यहां माता जानकी की पूजा भगवान राम के बिना की जाती है, जो इसे दुनिया के अनोखे मंदिरों में शामिल करती है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने आज रंगपंचमी पर्व पर माता जानकी और लव-कुश की दिव्य धरा करीला धाम, अशोकनगर में सपत्नीक मां जानकी की पूजा-अर्चना की। सीएम ने मैया से प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।

मंदिर में माता जानकी के साथ लव-कुश और महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमाएं विराजमान हैं। हालांकि बाद में परिसर में भगवान राम-सीता और राधा-कृष्ण के मंदिर भी बनवाए गए हैं। हर साल रंगपंचमी पर यहां तीन दिवसीय विशाल मेला लगता है, जिसमें देशभर से करीब 25 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। 

दूर-दूर से आए श्रद्धालु माता जानकी के दरबार में अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। इस धाम की सबसे अनोखी परंपरा यह है कि यहां मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु प्रसाद नहीं चढ़ाते, बल्कि नृत्यांगनाओं द्वारा नृत्य करवाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

स्थानीय मान्यता के अनुसार जब भगवान राम ने माता सीता को वन में छोड़ा था, तब यही स्थान था जहां लव-कुश का जन्म हुआ। कहा जाता है कि उनके जन्म के समय स्वर्ग से अप्सराएं यहां आईं और आनंद में नृत्य किया। उसी घटना की स्मृति में आज भी यहां मन्नत पूरी होने पर नृत्य कराने की परंपरा निभाई जाती है।

इस साल रंगपंचमी मेले के अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी करीला धाम पहुंचे और माता जानकी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। उन्होंने कहा कि “करीला धाम आना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। आज महिला दिवस के अवसर पर मां जानकी के दर्शन का अवसर मिला, यह मेरे लिए विशेष आशीर्वाद है।”

करीला धाम की यह अनूठी परंपरा और आस्था हर साल लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है, जिससे यह स्थान प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है।

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