पटना। राजधानी के बहुचर्चित NEET छात्रा रेप और मौत मामले में मुख्य आरोपी और शंभू गर्ल्स हॉस्टल के संचालक मनीष रंजन को अदालत से बड़ा झटका लगा है। पटना सिविल कोर्ट (ADJ 6) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मनीष रंजन की जमानत याचिका खारिज कर दी है। हालांकि, फैसले की विस्तृत कॉपी आना अभी बाकी है, लेकिन ओपन कोर्ट में जजमेंट सुना दिया गया है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी और पुलिस से सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की पहली जांच अधिकारी (IO) रौशनी कुमारी और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि मुख्य गवाहों के बयान कैमरे पर रिकॉर्ड क्यों नहीं किए गए? साथ ही, जब मनीष रंजन 10 जनवरी को थाने आया था, तो उससे गहन पूछताछ क्यों नहीं की गई? कोर्ट ने पुलिस की जांच रिपोर्ट में मनीष के स्पष्ट रोल पर भी असंतोष जताया।
CBI की जांच पर भी उठे सवाल
मामले की जांच कर रही CBI को भी अदालत की नाराजगी झेलनी पड़ी। कोर्ट ने सवाल किया कि अब तक पीड़िता और आरोपी के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच क्यों नहीं कराई गई? जब जांच एजेंसी को मौत के सही कारणों का पता नहीं था, तो मर्डर की धारा जोड़ने में देरी क्यों हुई? CBI के अधिकारी इन तकनीकी सवालों का संतोषजनक जवाब देने में विफल रहे।
परिजनों का आरोप और आगामी प्रक्रिया
पीड़ित परिवार के वकील एसके पांडेय ने बताया कि मनीष रंजन को इस साजिश का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। वहीं, छात्रा की मां ने CBI और SIT पर मामले को रफा-दफा करने का आरोप लगाया है। सुरक्षा और संवेदनशीलता के कारण मामले की कुछ सुनवाई जज के चैंबर में भी हुई। फिलहाल, मनीष रंजन बेउर जेल में ही रहेंगे। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जजमेंट की कॉपी मिलने के बाद आरोपी पक्ष हाईकोर्ट का रुख कर सकता है।
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