इन्द्रपाल सिंह, इटारसी। नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा तहसील के ग्राम बटकी से सरकारी शिक्षा व्यवस्था की एक हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां बच्चों की पढ़ाई अब स्कूल के ब्लैकबोर्ड पर नहीं, बल्कि जमीन पर लिखी गिनती और वर्णमाला तक सिमटकर रह गई है।

नौनिहालों को मंगल भवन में बैठना पड़ रहा

दरअसल, गांव का प्राथमिक स्कूल भवन जर्जर होकर टूट चुका है और पिछले दो साल से बच्चों के पास स्कूल ही नहीं है। ऐसे में गांव के 37 मासूम बच्चों को पढ़ाई के लिए डेढ़ किलोमीटर दूर इकलानी गांव के एक सार्वजनिक मंगल भवन में बैठना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि वहां न तो कक्षा है, न बेंच–डेस्क और न ही पढ़ाई का कोई बुनियादी इंतजाम। ऊपर टीन शेड और नीचे फर्श पर गिनती और हिंदी वर्णमाला लिखी हुई है। जमीन पर बैठकर बच्चे पढ़ाई को मजबूर हैं। सवाल है जब 2 साल से स्कूल भवन नहीं बन पाया, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? और तब तक क्या बच्चों को जमीन पर बैठकर ही पढ़ाई करनी पड़ेगी?

अगले वित्तीय वर्ष में स्वीकृति मिलने की संभावना

मामले में डीपीसी डॉ. राजेश जायसवाल का कहना है कि बटकी में स्कूल भवन निर्माण के लिए प्रस्ताव पहले भेजा गया और स्वीकृति भी मिल चुकी थी। तकनीकी कारणों से राज्य शिक्षा केंद्र से राशि प्राप्त नहीं हो पाई, जिससे निर्माण शुरू नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि जिला शिक्षा केंद्र और कलेक्टर की ओर से इस संबंध में पत्राचार किया गया है। राज्य शिक्षा केंद्र ने इसे वार्षिक कार्ययोजना में शामिल करने के निर्देश दिए हैं, जिससे अगले वित्तीय वर्ष में इसकी स्वीकृति मिलने की संभावना है। उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों में बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था करने वाले शिक्षक की सराहना भी की।

डॉ. राजेश जायसवाल, डीपीसी

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