जैसे-जैसे रमजान अपने अंतिम दौर में पहुंच रहा है, वैसे-वैसे ईद की तैयारियां तेज हो गई हैं और हर घर में खुशियों की आहट सुनाई देने लगी है. आज 17 मार्च को 27वां रोजा रखा गया है. ईद-उल-फितर का नाम सुनते ही खुशियों, भाईचारे और मिठास से भरा माहौल आंखों के सामने आ जाता है. रमजान के पूरे महीने रोजा रखने के बाद जब यह त्योहार आता है, तो हर चेहरे पर सुकून और खुशी साफ नजर आती है.

साल 2026 में ईद की तारीख को लेकर लोगों में उत्सुकता बनी हुई है, क्योंकि यह पर्व पूरी तरह चांद दिखने पर निर्भर करता है. यही वजह है कि इसकी सही तारीख पहले से तय नहीं होती.

ईद की संभावित तारीख

भारत में ईद-उल-फितर 2026 की संभावित तारीख 20 मार्च या 21 मार्च है. यह पूरी तरह चांद दिखने पर निर्भर करता है. यदि 19 मार्च की शाम को चांद दिखाई देता है तो 20 मार्च को ईद मनाई जाएगी. अगर चांद नजर नहीं आता है तो ईद 21 मार्च को मनाई जाएगी.

हर साल बदलती तारीख

ईद की तारीख इस्लामिक चंद्र कैलेंडर के अनुसार तय होती है. चांद रात वह होती है जब रमजान का आखिरी चांद दिखाई देता है। भौगोलिक स्थिति के कारण अलग-अलग देशों में चांद अलग समय पर नजर आता है. इसी वजह से भारत में ईद अक्सर खाड़ी देशों के एक दिन बाद मनाई जाती है.

ईद अल फितर और ईद अल अजहा के बीच

इस्लाम में दो प्रमुख त्योहार होते हैं. रमजान के बाद मनाई जाने वाली ईद अल फितर को मीठी या छोटी ईद कहा जाता है. वहीं हज के बाद मनाई जाने वाली ईद अल अजहा को बड़ी ईद कहा जाता है. दोनों का अपना अलग धार्मिक महत्व है.

फितरा और जकात भी जरूरी

ईद की नमाज से पहले हर मुस्लिम को फितरा अदा करना जरूरी होता है. यह गरीब और जरूरतमंद लोगों का हक होता है. इसके अलावा जकात भी दी जाती है, जो सालभर की कमाई का एक हिस्सा होता है. इसका उद्देश्य समाज में जरूरतमंदों की मदद करना है.

ईद पर पारंपरिक पकवान होते हैं खास

ईद के दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं. एक-दूसरे को गले लगाकर ईद मुबारक कहते हैं. घरों में सेवईं, शीर खुरमी, बिरयानी, कबाब, कोरमा, फिरनी जैसे खास पकवान बनाए जाते हैं. रिश्तेदारों के बीच तोहफों का आदान-प्रदान होता है.