कुंदन कुमार/पटना। सोमवार को राजधानी में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार अचानक जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रदेश कार्यालय पहुंचे। अवसर था महान समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती का। निशांत कुमार ने न केवल समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया, बल्कि कार्यकर्ताओं के साथ संवाद कर राजनीति और समाजवाद पर अपने विचार भी साझा किए।

​लोहिया के सिद्धांतों और नीतीश कुमार का जुड़ाव

​निशांत कुमार ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनके पिता, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, हमेशा से डॉ. लोहिया के आदर्शों पर चलते आए हैं। उन्होंने एक पुराना संस्मरण साझा करते हुए बताया कि नीतीश कुमार ने पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में लोहिया जी के ओजस्वी भाषणों को सुना था। उसी क्षण से उनके मन में समाजवाद के प्रति गहरी निष्ठा पैदा हुई, जिसे उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का आधार बनाया। निशांत के अनुसार, आज बिहार में जो भी विकास और सामाजिक परिवर्तन दिख रहा है, उसके मूल में लोहिया जी की ही विचारधारा है।

​महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय का मॉडल

​लोहिया जी के नर-नारी समानता के आह्वान का जिक्र करते हुए निशांत ने कहा कि उनके पिता ने इस सपने को जमीन पर उतारा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार देश का पहला ऐसा राज्य बना जिसने पंचायत चुनाव में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया। इसके साथ ही सरकारी नौकरियों में आरक्षण के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया गया। यह समाजवाद का वह व्यवहारिक रूप है जिसका सपना लोहिया जी ने देखा था।

​समानता का संदेश

​निशांत कुमार ने स्पष्ट किया कि नीतीश सरकार की नीतियां समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। उन्होंने कहा, पिताजी का मानना है कि समाज में कोई बड़ा या छोटा नहीं होता। सभी समान हैं और सबको समान अवसर मिलने चाहिए। इसी भावना के साथ समाज के हर तबके, चाहे वह दलित हो, पिछड़ा हो या अल्पसंख्यक, सबके उत्थान के लिए काम किया जा रहा है।