गौरव जैन, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही. छत्तीसगढ़ के बुनियादी ढांचे और रेल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में आज एक नया अध्याय जुड़ गया. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के बिलासपुर रेल मंडल के अंतर्गत निर्माणाधीन पेंड्रारोड-गेवरारोड रेल परियोजना ने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर लिया है. 30 मार्च को नव-निर्मित पेंड्रारोड-भाड़ी-पेंड्रारोड डबल रेल लाइन सेक्शन में प्रथम डीजल इंजन का सफलतापूर्वक परिचालन (Trial Run) संपन्न हुआ.

सफल रहा ट्रायल रन
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, आज शाम 16:30 बजे (4:30 PM) ट्रैक की मजबूती और तकनीकी बारीकियों की जांच के लिए डीजल इंजन का ‘रॉलिंग’ ट्रायल किया गया. इरकॉन (IRCON) द्वारा तैयार किए गए इस 25 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर इंजन ने सुगमता से अपनी यात्रा पूरी की.

गति शक्ति बिलासपुर के सीनियर सेक्शन इंजीनियर कार्तिक पासवान ने इस अवसर पर जानकारी देते हुए बताया:
”इरकॉन द्वारा निर्मित इस ट्रैक पर इंजन का ट्रायल पूरी तरह सफल रहा है. यह हमारे लिए एक बड़ी तकनीकी जीत है. वर्तमान प्रगति को देखते हुए हमें पूरी उम्मीद है कि दिसंबर 2026 तक यह पूरी परियोजना (पेंड्रारोड से गेवरारोड) बनकर तैयार हो जाएगी.”
परियोजना एक नजर में : पेंड्रारोड से गेवरारोड
यह रेल लाइन छत्तीसगढ़ की सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक और रणनीतिक रेल परियोजनाओं में से एक है.
कुल लंबाई : लगभग 135 किलोमीटर.
एजेंसियां : इसका निर्माण इरकॉन (IRCON) और CEWRL (Chhattisgarh East West Railway Limited) के संयुक्त प्रयासों से किया जा रहा है.
वर्तमान स्थिति : पेंड्रारोड से भाड़ी के बीच के 25 किलोमीटर का हिस्सा अब परिचालन परीक्षण के लिए तैयार है. शेष 110 किलोमीटर पर काम युद्ध स्तर पर जारी है.
क्यों खास है यह रेल लाइन?
यह परियोजना केवल पटरियां बिछाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम होंगे:
कोयला परिवहन में क्रांति : गेवरारोड क्षेत्र एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदानों में से एक है. इस नई लाइन से कोयले की ढुलाई तेज होगी, जिससे देश के पावर प्लांट्स को ईंधन की आपूर्ति सुगम हो जाएगी.
यात्री सुविधाओं का विस्तार : भविष्य में इस मार्ग पर यात्री ट्रेनें चलने से पेंड्रारोड और कोरबा/गेवरा के बीच की दूरी कम हो जाएगी, जिससे स्थानीय लोगों को आवाजाही में बड़ी राहत मिलेगी.
आर्थिक विकास : नई रेल लाइन के आसपास के क्षेत्रों में नए व्यापारिक अवसर और रोजगार सृजित होंगे.
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