कुमार इंदर, जबलपुर। मध्यप्रदेश के संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को लेकर हाईकोर्ट का अहम निर्देश सामने आया है। 10 साल से ज्यादा समय से काम कर रहे कर्मचारियों को स्थाई सेवा में नहीं रखने का कोई ठोस आधार नहीं है। कोर्ट ने ऐसे कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन देने के निर्देश दिए है।
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सम्मानजनक जीवन स्तर का अधिकार
ऐसे कर्मचारियों को वर्गीकरण और इससे जुड़े लाभ मिलने चाहिए। उन्हें अन्य कर्मचारी की तुलना में कम वेतन देना उचित नहीं है। लंबे समय से काम कर रहे इन कर्मचारियों को आर्थिक न्याय और सम्मानजनक जीवन स्तर का अधिकार है।
प्रदेश में 5 लाख से ज्यादा संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी
बता दें कि प्रदेश में 5 लाख से ज्यादा संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत है। मध्यप्रदेश में करीब ढाई लाख संविदा कर्मचारी कार्यरत है। बिजली विभाग में करीब डेढ़ लाख और सरकारी विभाग में 1 लाख आउटसोर्स कर्मचारी है। याचिका में 2016 की नीति के तहत वर्गीकरण और न्यूनतम वेतन देने की मांग की है।

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