गोरखपुर. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के युवाओं को इमर्जिंग टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ी सौगात दी. उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की तरफ से संचालित महाराणा प्रताप इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमपीआईटी) में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) फाउंडेशन के सहयोग से बने पूर्वी उत्तर प्रदेश के पहले अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) का लोकार्पण किया. टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और टीसीएस के सीईओ के. कृतिवासन की उपस्थिति में लोकार्पण समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने खुद को न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेट, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भी स्थापित किया है.

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जो परिवर्तन देखने को मिल रहा है, वैसा नौ वर्ष पहले हो पाना कठिन था. तब सड़कें अच्छी नहीं थीं, बिजली का अता-पता नहीं था. सुरक्षा संकट में थी, न नीति थी और न नीयत. सुरक्षा का माहौल और नीति नहीं होने के कारण निवेश भी नहीं होता था. जब निवेश नहीं होगा तो स्वाभाविक रूप से रोजगार भी नहीं मिलेगा. यही स्थिति तब यूपी की थी, लेकिन आज का यूपी हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है. मुख्यमंत्री ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे जितना टेक्नोलॉजी के नजदीक जाएंगे, टेक्नोलॉजी हाथ का खिलौना बनती जाएगी. नौजवान जब टेक्नोलॉजी के साथ जुड़ेंगे, पारंगत बनेंगे तो उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, नवाचार सहित हर क्षेत्र में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी.

वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

सीएम योगी ने इमर्जिंग टेक्नोलॉजी के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश का पहला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने में सहयोग के लिए टाटा समूह के प्रति आभार जताया. उन्होंने कहा कि यह सेंटर वर्तमान और भविष्य की इमर्जिंग टेक्नोलॉजी की आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सहायक होगा. इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के रोडमैप को एक महत्वपूर्ण प्लेटफार्म मिलेगा. इस सेंटर को एआई, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी, स्पेस टेक्नोलॉजी, थ्रीडी प्रिंटिंग जैसी डिजिटल युग की जरूरतों पर फोकस करते हुए आगे बढ़ाया जा रहा है. यह सेंटर तकनीकी उन्नयन, रिसर्च, इनोवेशन, स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की दृष्टि से युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगा. एमपीआईटी में स्थापित यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पीएम मोदी की डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया मुहिम को भी आगे बढ़ाने में प्रभावी भूमिका का निर्वहन करेगा.

युवाओं, किसानों और महिलाओं के लिए टेक्नोलॉजी की नई ज्योति

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस गोरखपुर, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमोत्तर बिहार और नेपाल की तराई से जुड़े नौजवानों, अन्नदाता किसानों और महिलाओं के लिए टेक्नोलॉजी की ज्योति बनकर आया है. यह न केवल पूर्वी उत्तर प्रदेश, बल्कि भारत के विकास को एक नया प्रकाश देने का माध्यम बनेगा. उन्होंने प्रसन्नता जताई कि यह सेंटर ऐसे क्षेत्र में बना है, जिसे कभी उत्तर प्रदेश का सबसे बैकवर्ड एरिया माना जाता था. अब इस क्षेत्र में युवा, किसान और नारी शक्ति तकनीकी दृष्टि से सशक्त होकर पीएम मोदी के विजन के अनुरूप पूरे क्षेत्र की समृद्धि में योगदान देंगे.

एमपी शिक्षा परिषद की स्थापना और इसके योगदान का उल्लेख

अपने संबोधन में सीएम योगी ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना और इसके योगदान का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि देश जब पराधीन था तब 1932 में तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत श्रीदिग्विजयनाथ जी महाराज ने गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की. यह वही शिक्षा परिषद है, जिसने पूर्वी उत्तर प्रदेश के पहले गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए अपने दो संस्थान सरकार को देकर विश्वविद्यालय का शुभारंभ कराया. इसी शिक्षा परिषद के उपक्रम महाराणा प्रताप इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में टाटा ग्रुप के सहयोग से शानदार सेंटर आफ एक्सीलेंस यहां के युवाओं को प्राप्त हुआ है.

नॉलेज पावर हाउस बन रहा गोरखपुर

सीएम योगी ने कहा कि एक समय था जब पूर्वी उत्तर प्रदेश सबसे पिछड़ा माना जाता था. जबकि आज पीएम मोदी की प्रेरणा से यह क्षेत्र आगे बढ़ता हुआ, नॉलेज पावर हाउस के रूप में अपने आप को स्थापित कर रहा है. गोरखपुर में चार पूर्ण क्रियाशील विश्वविद्यालय कार्यरत हैं. इसके साथ ही अभी कुछ दिन पहले भारत सरकार के सहयोग से सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क की भी स्थापना गोरखपुर में की गई है.

एक्सप्रेसवे प्रदेश बना उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि नौ वर्ष में यूपी ने खुद को एक्सप्रेसवे प्रदेश के रूप में स्थापित किया है. देश मे 55 प्रतिशत एक्सप्रेसवे यूपी के पास है. गंगा एक्सप्रेसवे इसी माह हम राष्ट्र को समर्पित कराने जा रहे हैं. तब उत्तर प्रदेश का देश के एक्सप्रेसवे में 60 फीसदी हिस्सा होगा. पीएम मोदी के हाथों मंगलवार को लोकार्पित दिल्ली-देहरादून आर्थिक कॉरिडोर का 65 से 70 फीसदी हिस्सा उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है, जिसका भरपूर फायदा प्रदेश को मिलेगा.

यूपी और टेक्नोलॉजी, दोनों में अनलिमिटेड पोटेंशियल

मुख्यमंत्री ने कहा टेक्नोलॉजी का विभिन्न क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जा सकता है, इसमें अनलिमिटेड पोटेंशियल है, ठीक उत्तर प्रदेश की तरह. यूपी के पोटेंशियल को आगे बढ़ाने में टेक्नोलॉजी बड़ी भूमिका का निर्वहन कर सकती है. सरकार की तरफ से अनुकूल वातावरण बनाने का परिणाम है कि भारत में 55 फीसदी मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग अकेले उत्तर प्रदेश में हो रही है और बड़ी संख्या में रोजगार मिल रहा है. 55 से 60 फ़ीसदी इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट भी उत्तर प्रदेश में बन रहे हैं. 96 लाख से अधिक एमएसएमई यूपी के पास हैं. वर्तमान में 32000 से अधिक बड़े कारखाने उत्तर प्रदेश में संचालित हैं. 22000 से अधिक स्टार्टअप प्रदेश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं.

बुंदेलखंड में 56000 एकड़ में बन रही इंडस्ट्रियल सिटी

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में एनसीआर आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का हब बना है. कानपुर लेदर व ड्रोन टेक्नोलॉजी हब बना है. पूर्वी उत्तर प्रदेश एग्रीटेक और एमएसएमई का हब बन रहा है. लखनऊ डिफेंस कॉरिडोर के रूप में विकसित हो रहा है. इसी तर्ज पर बुंदेलखंड में 56000 एकड़ में एक नई इंडस्ट्रियल सिटी, फ्यूचर रेडी इंडस्ट्रियल टाउनशिप और फार्मा पार्क की स्थापना की जा रही है.

एआई वर्तमान दौर की आवश्यकता

सीएम योगी ने कहा कि एआई मौजूदा दौर की आवश्यकता है. हम सबको इसमें पीछे नहीं रहना है. उन्होंने एमपीआईटी के निदेशक और फैकल्टी का आह्वान किया कि वे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में युवाओं के लिए अलग-अलग प्रकार के सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री कोर्स बनाएं, जो उन्हें उनके लक्ष्य की ओर आगे ले जाएं.

सीओई का भ्रमण कर अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की जानकारी ली सीएम ने

मुख्यमंत्री ने टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन व टीसीएस के सीईओ के. कृतिवासन के साथ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच लोकार्पण करने के बाद अत्याधुनिक भवन एवं लैब्स (प्रयोगशालाओं) का भ्रमण कर अवलोकन किया. उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब, साइबर सिक्योरिटी लैब, ड्रोन टेक्नोलॉजी लैब, थ्रीडी प्रिंटिंग लैब की व्यवस्थाओं, सुविधाओं और कार्यप्रणाली की जानकारी ली. मुख्यमंत्री को बताया गया कि यह सीओई ‘एआई फॉर आल’ की अवधारणा पर आधारित है, जिसके माध्यम से तकनीक को समाज के हर वर्ग तक सुलभ बनाया जाएगा.