Dharm Desk – आज 28 अप्रैल को प्रदोष व्रत रखा जा रहा है खास बात यह है कि इस बार यह व्रत मंगलवार के दिन पड़ रहा है. जिसे भौम प्रदोष कहा जाता है. यह संयोग बेहद शुभ माना जाता है. इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ हनुमान जी की उपासना करने से जीवन की बाधाएं, नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक तनाव दूर होते है. साथ ही आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति में वृद्धि होती है.

प्रदोष काल में अभिषेक करने का मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि आज 28 अप्रैल को शाम 6 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 29 अप्रैल को शाम 7 बजकर 51 मिनट तक रहेगी. प्रदोष काल सूर्यास्त के समय से शुरू होकर लगभग डेढ़ घंटे तक रहता है, जो पूजा के लिए सबसे शुभ समय कहा जाता है. इसी काल में भगवान शिव की आराधना विशेष फलदायी होती हैं.

क्यों खास है भौम प्रदोष व्रत

जब प्रदोष व्रत मंगलवार को आता है तो उसे भौम प्रदोष कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से कर्ज, विवाद, भय और गलतफहमियों से मुक्ति मिलती है. यह व्रत न केवल शारीरिक बल्कि आध्यात्मिक जीवन को भी संतुलित करता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है.

प्रदोष व्रत की पूजा विधि और नियम

प्रदोष व्रत की पूजा सरल व अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है. इस दिन सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें और दिनभर उपवास रखें। शाम को प्रदोष काल में पूजा स्थान को शुद्ध कर शिवलिंग या महादेव की प्रतिमा स्थापित करे. इसके बाद जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें. चंदन, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित करें. दीपक और धूप जलाकर विधिपूर्वक आरती करें और भगवान को भोग लगाएं. कई भक्त इस दौरान प्रदोष व्रत कथा का श्रवण भी करते हैं.

मंत्र जाप का विशेष महत्व

प्रदोष काल में ओम नमः शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र का जाप अत्यंत फलदायी माना जाता है. इन मंत्रों के नियमित जाप से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है.

हनुमान पूजा का भी है विशेष योग

मंगलवार होने के कारण इस दिन हनुमान जी की पूजा का भी विशेष महत्व है. भक्त हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करते हैं तथा सिंदूर अर्पित कर संकटों से मुक्ति की कामना करते हैं. इस दिन की गई भक्ति से भय, बाधाएं और नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती है.