Narasimha Jayanti 2026 : नरसिंह जयंती की तारीख को लेकर भक्तों में असमंजस बना हुआ है. 29 अप्रैल या 30 अप्रैल? लेकिन वैदिक पंचांग ने इस भ्रम को पूरी तरह साफ कर दी है. भक्तों के लिए यह सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि आस्था, सुरक्षा और धर्म की विजय का प्रतीक पर्व है. जब भगवान विष्णु अपने उग्र अवतार नरसिंह भगवान के रूप में भक्तों की रक्षा के लिए प्रकट हुए थे.

कब मनाई जाएगी नरसिंह जयंती?
वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल चतुर्दशी तिथि 29 अप्रैल को शाम 7:51 बजे शुरू होगी और 30 अप्रैल को रात 9:12 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के आधार पर यह पर्व 30 अप्रैल, गुरुवार को मनाया जाएगा. पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 4:17 से 6:56 बजे तक रहेगा. जिसे अत्यंत फलदायी माना गया है.
क्यों खास है यह पर्व?
नरसिंह जयंती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह अधर्म पर धर्म की विजय का जीवंत प्रतीक है. मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से ग्रह दोष शांत होते है. जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है. श्रद्धा से की गई पूजा एकादशी व्रत के समान पुण्य प्रदान करती है.
भगवान के नरसिंह अवतार की कथा
इस पर्व के पीछे जुड़ी कहानी बेहद प्रेरणा दायक है. राक्षस राजा हिरण्यकशिपु ने खुद को भगवान मान लिया था. लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था. कई बार हत्या के प्रयास के बावजूद प्रह्लाद की रक्षा होती रही. जिससे हिरण्यकशिपु का अहंकार और बढ़ता गया.
हिरण्यकशिपु ने ऐसा वरदान मांगा कि वह लगभग अमर हो जाए. न इंसान से मरे, न जानवर से, न दिन में, न रात में, न अंदर, न बाहर, लेकिन जब अत्याचार बढ़ा, तब नरसिंह भगवान प्रकट हुए. उन्होंने संध्या समय, दहलीज पर, अपनी जांघ पर बैठाकर और नाखूनों से उसका वध कर दिया था. इस घटना ने साबित कर दिया कि अहंकार कितना भी बड़ा क्यों न हो, अंत में जीत सच्ची भक्ति और धर्म की ही होती है.
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