केरलम के सबरीमाला मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को भी सुनवाई जारी रही। एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने सुनवाई के 10वें दिन कहा कि सबरीमाला मंदिर में एंट्री का फैसला अब भी लागू है। इस पर स्टे नहीं है लेकिन मंदिर में प्रवेश नहीं मिल रहा है। इसपर कोर्ट ने कहा कि सामाजिक सुधार के नाम पर धर्म को खोखला नहीं किया जा सकता। हालांकि, कोर्ट कभी यह तय नहीं करता कि धर्म में क्या जरूरी है या और क्या नहीं। इसका फैसला तो धर्म ही करता है।
इस पर जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि हम इस भूमि की सभ्यता के विकास और धार्मिक इतिहास को नजरअंदाज नहीं कर सकते। इसी बैकग्राउंड से संविधान के आर्टकिल 25 और 26 आए हैं। संविधान और बाकी सब ठीक है लेकिन हमें इतिहास नहीं भूलना चाहिए। आप अतीत को नजरअंदाज करके यह नहीं कह सकते कि यह एक कोरी स्लेट है। इस पर जयसिंह ने कहा कि इस पर डिबेट हो सकती है। यह क्लीन स्लेट है।
सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई हुई
सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
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