Dharm Desk – Buddha Purnima 2026 : गौतम बुद्ध का जन्मोत्सव बुद्ध पूर्णिमा के रूप में पूरे विश्व में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है. यह पर्व केवल उनके जन्म का ही प्रतीक नहीं, बल्कि ज्ञान प्राप्ति (बोधि) और महापरिनिर्वाण से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है. वैशाख पूर्णिमा के दिन ही बुद्ध का जन्म, ज्ञान और निर्वाण होने की मान्यता है. इस दिन करोड़ों श्रद्धालु बुद्ध के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते है.

तिथि और शुभ मुहूर्त का होगा

द्रिक पंचांग के अनुसार, बुद्ध पूर्णिमा की तिथि 30 अप्रैल को रात 9 :12 मिनट से प्रारंभ होकर 1 मई को रात 10 : 52 मिनट तक रहेगी. इस दिन चंद्रोदय शाम 6 : 52 मिनट पर होगा. धार्मिक दृष्टि से भी ये दिन विशेष फलदायी है, जब पूजा, ध्यान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है.

भगवान विष्णु का नौवां अवतार, बोधगया और सारनाथ मैं विशेष पूजा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु का नौवां अवतार भी बुद्ध को माना जाता है. इस दिन बौद्ध और हिंदू धर्म के लोग व्रत-उपवास रखते है. मंदिरों, स्तूपों में एकत्र होकर सामूहिक प्रार्थना करते है. विशेष रूप से बोधगया और सारनाथ जैसे पवित्र स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है.

बुद्ध पूर्णिमा पर बोधिवृक्ष की पूजा का महत्व

बुद्ध पूर्णिमा पर बोधिवृक्ष यानी पीपल के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व है. मान्यता है कि इसी वृक्ष के नीचे बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था. श्रद्धालु इस दिन वृक्ष पर दूध और इत्र मिश्रित जल अर्पित करते हैं और सरसों के तेल का दीपक जलाते है. जिससे सुख-शांति की कामना की जाती है.

आत्मज्ञान और प्रेरणा का संदेश डाटा गौतम बुद्ध का जीवन

गौतम बुद्ध का जीवन हमें आत्म-मूल्य और आत्मविश्वास की सीख देता हैं. उन्होंने बताया कि व्यक्ति की असली पहचान दूसरों के विचारों से नहीं, बल्कि उसके अपने आत्मविश्वास और गुणों से होती है. बुद्ध पूर्णिमा का पर्व इसी आत्मज्ञान और शांति का संदेश फैलाता है.

बुद्ध पूर्णिमा दान, करुणा व अहिंसा का पालन करने का दिन

इस दिन लोग सफेद वस्त्र धारण कर ध्यान (मेडिटेशन), प्रार्थना और सेवा कार्यों में भाग लेते है. जरूरतमंदों को दान देना, पशु-पक्षियों के प्रति करुणा दिखाना और अहिंसा का पालन करना इस पर्व की मुख्य विशेषताएं हैं. बुद्ध पूर्णिमा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि मानवता, शांति और सद्भाव का प्रतीक है.