कुंदन कुमार, पटना। हर साल 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाता है। यह दिन मजदूरों की मेहनत और अधिकारों को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। इस अवसर पर राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने “अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस” की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्रमवीर भाइयों ने अपनी निष्ठा, समर्पण, सेवा भाव व पसीने से देश निर्माण में अतुलनीय योगदान दिया है।

तो विकसित भारत की बात करना बेईमानी- तेजस्वी

इस मौके पर तेजस्वी यादव ने कहा कि, देश के विकास की नींव रख उसे प्रगति पथ पर ले जाने वाले श्रमिक भाइयों के उत्थान और बेहतरी पर सकारात्मक चर्चा का अभाव पीड़ादायक है। श्रमिकों, उनके परिजन, गांव और प्रदेश की प्रगति बिना विकसित भारत की बात करना बेईमानी है।

उन्होंने कहा कि, डबल इंजन सरकार की पूंजीपरस्त नीतियों का सीधा असर मजदूरों व कामगारों पर ही पड़ा है। पिछले 21 वर्षों से एनडीए सरकार की गरीब विरोधी नीतियों के कारण ही प्रतिवर्ष बिहार से लगभग 4 करोड़ लोग काम की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते है। पलायन संबंधित यह तथ्यपरक आंकड़ा भयावह है।

‘कभी गाली, तो कभी मिलती है गोली’

तेजस्वी यादव ने कहा कि, दूसरे राज्यों में ‘बिहारी’ को कभी गोली तो कभी गाली दी जाती है।‘बिहारियों’ को मिल रही इस पीड़ा का जिम्मेदार 21 वर्षों की NDA सरकार है। चाहे नोटबंदी हो, लॉकडाउन हो या LPG की कमी! बिहार के प्रवासी मजदूर हर बार प्रभावित हुए हैं। मजबूरी में मजदूर बिहार वापस भी आए लेकिन किस तरह से, ये पूरी दुनिया ने देखा है।

उन्होंने कहा कि, आज जब समूचे देश में गैस सिलेंडर का संकट है, जिससे प्रभावित होकर बड़ी संख्या में मजदूर व कामगार बिहार लौट रहे हैं। लेकिन उन लाखों मजदूरों के रोजगार, रोजी-रोटी का राज्य सरकार कोई प्रबंध नहीं कर रही है। बिहार के मजदूर, मजबूर होकर परदेस न गए तो फिर गुजरात-महाराष्ट्र और अन्य विकसित राज्यों की फैक्ट्री कैसे चलेगी?

बिहार का नाम ‘श्रमिक प्रदेश’ करने का दिया सुझाव

तेजस्वी ने कहा कि नाम बदलने के विशेषज्ञ भाजपाइयों खासकर बिहार के मनोनीत नए-नवेले बड़बोले मुख्यमंत्री को ‘श्रमिक दिवस’ का नाम बदल कर ‘बिहार समर्पित दिवस’ अथवा बिहार का नाम बदल कर ‘श्रमिक प्रदेश’ कर दिया जाना चाहिए। बिहार विगत 21 सालों में औद्योगिक उत्पादन में नगण्य परंतु श्रमिकों की सप्लाई में अव्वल है। NDA सरकार पलायन रोकने की दिशा में कोई ठोस कार्य नहीं कर रही है भले ही बिहार के मजदूर, मजबूर रहें- घर से दूर रहें।

अंत में तेजस्वी यादव ने कहा कि, आइए, ‘विश्व श्रमिक दिवस’ पर हम सभी मिलकर बिहार से पलायन रोकने तथा श्रमिकों के जीवन में गुणात्मक सुधार के लिए संकल्प लें। श्रमेव जयते!

ये भी पढ़ें- Labour Day 2026: बिहार के विकास की गाथा लिख रहे मजदूरों का विकास कौन करेगा? आज भी काम की तलाश