नई दिल्ली। दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने राजधानी के सभी निजी, गैर-सरकारी और मान्यता प्राप्त विद्यालयों को आदेश दिया है कि वे हर महीने फीस (स्कूल शुल्क) वसूलें। निदेशालय ने यह निर्देश 30 अप्रैल को जारी करते हुए स्पष्ट किया कि अगर विद्यालय इस आदेश का पालन नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। निदेशालय के अनुसार, यह कदम अभिभावकों से मिली शिकायतों के बाद उठाया गया है, जिनमें आरोप लगाया गया था कि कुछ स्कूल उन्हें द्विमासिक, त्रैमासिक या अन्य अग्रिम आधार पर शुल्क का भुगतान करने के लिए मजबूर कर रहे हैं, जिससे परिवारों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ पड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए निदेशालय ने यह कदम उठाया है ताकि अभिभावकों को इस तरह के वित्तीय दबाव से बचाया जा सके और शुल्क वसूलने की प्रक्रिया को नियमित और पारदर्शी बनाया जा सके।

निदेशालय ने इस आदेश में कहा कि “हर महीने फीस वसूलने से अभिभावकों को भुगतान के लिए नियमित अंतराल मिलेंगे, जिससे उनकी वित्तीय योजना अधिक व्यवस्थित और सहज रहेगी। साथ ही, अगर किसी स्कूल ने इन निर्देशों का उल्लंघन किया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें स्कूल के पंजीकरण को निलंबित करने जैसी सजा भी हो सकती है। निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वे हर महीने शुल्क (स्कूल फीस) वसूलने के नियम का पालन करें। नए आदेश के तहत, विद्यालयों को एक किश्त में एक ही कैलेंडर माह से ज्यादा की अवधि के लिए फीस का भुगतान अनिवार्य, आवश्यक या बाध्यकारी नहीं करना होगा। यह कदम पहले से जारी निर्देशों और दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के अनुरूप है, जिसमें अभिभावकों के लिए फीस वसूली की सुविधाजनक और निष्पक्ष संरचना को सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया था। निदेशालय ने कहा कि इस कदम से अभिभावकों को अनावश्यक वित्तीय बोझ से राहत मिलेगी, और स्कूलों में फीस वसूली की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और नियमित होगी।

एक महीने से ज्यादा की फीस नहीं ले सकेंगे स्कूल

दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने अपने नए आदेश में स्पष्ट किया है कि कोई भी विद्यालय किसी भी अभिभावक या संरक्षक को एक कैलेंडर माह से ज्यादा की फीस एक ही किश्त में देने के लिए बाध्य, मजबूर या विवश नहीं करेगा। यह आदेश उन विद्यालयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का संकेत देता है, जो अग्रिम फीस वसूलने की प्रथा जारी रखते हैं, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि “जो अभिभावक या संरक्षक अपनी स्वेच्छा से और बिना किसी दबाव या लालच के एक महीने से ज्यादा की फीस एक ही किश्त में देना सुविधाजनक समझते हैं, उन्हें ऐसा करने की अनुमति दी जा सकती है”। यह व्यवस्था इस बात की गारंटी देती है कि जो अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार शुल्क का भुगतान करना चाहते हैं, वे वैकल्पिक रूप से ऐसा कर सकते हैं, लेकिन स्कूलों को उन्हें इसके लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

इस आदेश को स्कूल के नोटिस बोर्ड पर दिखाना होगा

आदेश में कहा गया है कि “कोई भी विद्यालय एडमिशन, निरंतर नामांकन या किसी भी अन्य छात्र सेवा के बदले एडवांस फीस भुगतान को पूर्व शर्त नहीं बनाएगा”। इसका मतलब है कि स्कूल अब किसी भी सेवा के लिए अग्रिम शुल्क वसूलने के लिए अभिभावकों को मजबूर नहीं कर सकते, जिससे अभिभावकों को अतिरिक्त वित्तीय बोझ से राहत मिलेगी। इसके साथ ही, आदेश में यह भी बताया गया कि सभी विद्यालयों को यह आदेश अपने नोटिस बोर्ड पर प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा और इसे सात कार्य दिवसों के भीतर अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड भी करना होगा, ताकि सभी को इस नए निर्देश के बारे में समय रहते जानकारी मिल सके।

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